दस्तावेजों की वैधता पर विवाद, कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

दस्तावेजों की वैधता पर विवाद, कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 25, 2026, 3:16:00 PM

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नागरिकता से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बनना, जिसमें आम लोगों को अपनी नागरिकता सिद्ध करने की आवश्यकता महसूस हो, लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।

एक बयान जारी कर दूबे ने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा वर्षों से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज जारी किए जाते रहे हैं। इन दस्तावेजों को सरकारी पहचान और विभिन्न सेवाओं के लिए मान्यता भी दी गई। ऐसे में यदि अब इन्हें नागरिकता के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है, तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि सरकार ने समय-समय पर नागरिकों को इन दस्तावेजों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया और कई योजनाओं तथा सेवाओं में इन्हें आवश्यक भी बनाया। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में इनकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होना लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि नागरिकता की पुष्टि का दायित्व पूरी तरह आम लोगों पर डालना उचित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि नागरिकता के निर्धारण के लिए अंतिम रूप से कौन-से दस्तावेज या मानक मान्य होंगे और पहले से जारी सरकारी दस्तावेजों की स्थिति क्या होगी।

दूबे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक अवैध घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा, लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी बनती दिखाई दे रही हैं, जहां आम नागरिकों के मन में ही अपनी पहचान और नागरिकता को लेकर आशंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं बताया।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने ही जारी किए गए दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, तो इससे जनता और शासन के बीच विश्वास कमजोर पड़ सकता है। लोकतंत्र की मजबूती सरकार और नागरिकों के बीच पारदर्शिता तथा भरोसे पर निर्भर करती है।

कांग्रेस महासचिव ने केंद्र सरकार से मांग की कि नागरिकता से जुड़े मानकों को लेकर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि वर्षों से जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों का महत्व और वैधानिक आधार क्या रहेगा, ताकि नागरिकों के बीच किसी प्रकार की अनिश्चितता या भ्रम की स्थिति न बने।