बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही महागठबंधन में उथल-पुथल का दौर जारी है। खास तौर पर राजद और कांग्रेस के बीच तल्खी खुलकर सामने आई है। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस के भीतर भी हालात ठीक नहीं दिख रहे। पिछले कुछ समय से कांग्रेस विधायकों की गतिविधियों ने पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कई विधायक लगातार पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे। सदाकत आश्रम में प्रदेश नेतृत्व की ओर से बुलाई जा रही बैठकों में भी कई विधायक बार-बार गैरमौजूद रहे। इसी बीच चार विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी। इन तमाम घटनाओं को देखते हुए अब कांग्रेस हाईकमान ने सख्त रुख अपनाया है।
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार कांग्रेस के सभी छह विधायकों को 23 जनवरी को दिल्ली तलब किया गया है। इसे पार्टी का बड़ा “क्राइसिस मैनेजमेंट” कदम माना जा रहा है। दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में कांग्रेस विधायक दल के निवर्तमान नेता शकील अहमद खां के साथ-साथ पार्टी के सांसदों को भी आमंत्रित किया गया है। सूत्रों की मानें तो जिन विधायकों पर दूसरी पार्टियों के संपर्क में होने का शक है, उनकी खासतौर पर वरिष्ठ नेताओं से वन-टू-वन मुलाकात कराई जाएगी।
23 जनवरी को दिल्ली पहुंचने वाले विधायकों से आलाकमान व्यक्तिगत बातचीत करेगा और उनकी नाराजगी के कारणों को समझने की कोशिश करेगा। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी छोड़ने से उन्हें किन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है और कांग्रेस में उनके लिए क्या संभावनाएं हैं। जरूरत पड़ी तो संगठन में उनकी भूमिका बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में विधायक दल नेता के चयन को लेकर भी चर्चा संभव है। आलाकमान आपसी सहमति बनाने की कोशिश करेगा, लेकिन सहमति नहीं बनने की स्थिति में अंतिम फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 23 जनवरी की दिल्ली बैठक बिहार कांग्रेस की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।