फंस गए भाई वीरेंद्र! जाएगी विधायकी, होगी जेल?

बिहार के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। मनेर से आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र की मुश्किलें बढ़ गई हैं

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 13, 2025, 9:39:00 AM

बिहार के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। मनेर से आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना पुलिस ने उनके खिलाफ धमकी और जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल के मामले में पटना सिविल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह चार्जशीट करीब 50 पन्नों की है, जिसमें पुलिस ने जांच के दौरान जुटाए गए सभी साक्ष्य कोर्ट के सामने रखे हैं।

यह मामला पंचायत सचिव संदीप कुमार से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच मोबाइल फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग चार्जशीट का अहम हिस्सा है। इसी ऑडियो के आधार पर पुलिस ने यह निष्कर्ष निकाला है कि विधायक द्वारा धमकी दी गई और आपत्तिजनक, जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस जांच में आरोपों को सही पाया गया है। इस मामले में एससी/एसटी थाने की भूमिका अहम रही है। भाई वीरेंद्र को पहले नोटिस भेजा गया था, जिसके बाद वे थाने पहुंचे थे और बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा किया गया था। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं, लेकिन कानूनी शिकंजा अब कसता नजर आ रहा है।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान विधायक की ओर से पुलिस को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिस ने तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया है। पंचायत सचिव संदीप कुमार अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि उन्हें फोन पर धमकाया गया और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया।

दरअसल, यह पूरा मामला 28 जुलाई 2025 का है, जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो तेजी से वायरल हुआ था। इस ऑडियो में मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र और पंचायत सचिव के बीच तीखी बातचीत सुनाई देती है। बातचीत के दौरान विधायक की ओर से जूते से मारने तक की धमकी देने की बात सामने आई थी।

बताया गया कि विधायक ने एक व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर पंचायत सचिव को फोन किया था। पंचायत सचिव फोन पर विधायक को पहचान नहीं पाए, इसी बात पर विवाद शुरू हो गया। बातचीत आगे बढ़ने के साथ भाषा और लहजा और अधिक आक्रामक होता चला गया। यही ऑडियो बाद में वायरल हुआ और इसी के आधार पर मामला दर्ज किया गया।

अब पुलिस ने अपनी जांच पूरी करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है, उनके तहत दोष सिद्ध होने पर विधायक भाई वीरेंद्र को अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है।

यह मामला सिर्फ एक ऑडियो विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के आचरण, प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव और कानून के सामने जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। अब आगे की कार्रवाई कोर्ट के स्तर पर होगी। अदालत में साक्ष्यों की जांच होगी और उसी के आधार पर यह तय होगा कि विधायक की कानूनी राह आगे किस दिशा में जाती है।

फिलहाल इतना तय है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर और गंभीर हो गया है। अब सबकी नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई और आगे होने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।