बिहार विधानसभा में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर हंगामा, सरकार बनाएगी नई डिजिटल नीति

बिहार विधानसभा में सोमवार को स्कूल-कॉलेज के बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 23, 2026, 5:21:00 PM

बिहार विधानसभा में सोमवार को स्कूल-कॉलेज के बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान जनता दल यूनाइटेड के विधायक समृद्ध वर्मा ने कहा कि बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की बढ़ती लत एक “अदृश्य महामारी” का रूप ले चुकी है। उन्होंने चिंता जताई कि यह प्रवृत्ति राज्य के भविष्य को प्रभावित कर रही है और बच्चों के मानसिक व सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रही है।

विधायक ने सदन में कहा कि जहां पहले बच्चे खिलौनों और किताबों के साथ समय बिताते थे, वहीं अब घंटों मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग करते रहते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इस समस्या को चेतावनी के रूप में चिह्नित किया गया है और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डोपामाइन आधारित डिजिटल आकर्षण बच्चों के मानसिक नियंत्रण को प्रभावित कर रहा है, जिससे वास्तविक जीवन नीरस लगने लगता है। नाबालिगों में चिड़चिड़ापन, व्यवहारगत बदलाव और एकाग्रता में कमी के मामले बढ़ रहे हैं।

समृद्ध वर्मा ने विशेष रूप से बिहार में इंटरनेट की व्यापक पहुंच का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल साक्षरता का स्तर अभी भी संतोषजनक नहीं है। “हम बच्चों को एआई सिखा रहे हैं, लेकिन डिजिटल दुनिया की विषाक्तता से बचाव का ठोस तंत्र कहां है?” उन्होंने सवाल उठाया।

इस पर राज्य के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए एक व्यापक नीति तैयार की जा रही है।

विधायक ने सुझाव दिया कि सभी सरकारी विद्यालयों में ‘डिजिटल हाइजीन’ को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। साथ ही, प्रत्येक जिला अस्पताल में ‘लत परामर्श केंद्र’ स्थापित किए जाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में माताओं को ‘स्क्रीन टाइम प्रबंधन’ के प्रति जागरूक करने के लिए जीविका दीदी नेटवर्क का उपयोग किया जाए।

सदन में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई और इसे आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व स्वास्थ्य नीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।