बिहार में 'डिप्टी सीएम' को लेकर घमासान मचा हुआ है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की 7 मई वाली अधिसूचना में विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे 'उप मुख्यमंत्री' नहीं बल्कि सिर्फ मंत्री लिखा गया है। इसके बाद सियासी गलियारे और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई कि क्या बिहार में डिप्टी सीएम का पद खत्म हो गया ? अब इस मामले पर सरकार का भी बयान सामने आया है।
दरअसल मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की 7 मई वाली अधिसूचना में मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों के विभाग तो बताए गए, लेकिन विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे 'उप मुख्यमंत्री' नहीं बल्कि सिर्फ मंत्री लिखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हुई थी और बिहार में डिप्टी CM पद खत्म होने की चर्चा होने लगी।
अब सरकार की ओर से सफाई आई है कि पद खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ अधिसूचना में हर बार पदनाम लिखना जरूरी नहीं होता। हालांकि पिछले साल की अधिसूचना में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के नाम के आगे बाकायदा “उप मुख्यमंत्री” लिखा गया था, ऐसे में सोशल मीडिया पर सवाल पूछा जा रहा है कि तो इस बार अचानक यह गायब कैसे हो गया? क्या यह सिर्फ टाइपिंग मिस्टेक है या फिर सत्ता के गलियारों में कुछ बड़ा पक रहा है?
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल की शपथ ग्रहण अधिसूचना ही मान्य है, जिसमें दोनों नेताओं को उप मुख्यमंत्री बताया गया था। सरकार ने साफ किया कि डिप्टी CM का पद खत्म नहीं हुआ है। पद खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ अधिसूचना में हर बार पदनाम लिखना जरूरी नहीं होता। वहीं उप मुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह “मुद्रण की भूल” हो सकती है और विभाग इसे सुधार लेगा।
वैसे आपको बता दें कि संविधान में “उप मुख्यमंत्री” पद का सीधा उल्लेख नहीं है। संविधान सिर्फ मुख्यमंत्री और मंत्रियों की बात करता है। लेकिन राजनीतिक परंपरा और सत्ता संतुलन में डिप्टी सीएम का पद बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में इस भूल को लेकर सियासी गलियारे से जनता तक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है और इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।