बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई। बिहार की नई सरकार के गठन और मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद आज पहली बार फुल कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी। पटना सचिवालय में आयोजित इस बैठक में 19 एजेंडों पर लगी मुहर लगी है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में कई अहम विभागीय प्रस्तावों, विकास योजनाओं, वित्तीय फैसलों और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा हुई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते यानी DA बढ़ाने का फैसला लिया गया। राज्य कर्मियों, पेंशन भोगियों के महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत वृद्धि की स्वीकृति दी गई है। डीए के रूप में 58 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत मिलेगा। सरकार के इस फैसले से करीब 9 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को सीधा फायदा पहुंचेगा। DA बढ़ने से न सिर्फ सैलरी बढ़ेगी बल्कि पेंशन भी बढ़ेगी।
सातवां वेतनमान पाने वाले कर्मचारियों और पेंशनरों का DA 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इसके साथ ही 19 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, छठे वेतनमान वाले कर्मचारियों का DA 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत किया गया। वहीं पांचवें वेतनमान वाले कर्मियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है।
बैठक में पांच संवेदनशील जिलों में नए ग्रामीण एसपी पद सृजित करने को भी मंजूरी दी गई। पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान में ग्रामीण एसपी की नियुक्ति होगी। सरकार का मानना है कि इससे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। वहीं उच्च शिक्षा को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के महाविद्यालयों में 132 नए पदों के सृजन को मंजूरी मिली है।
कैबिनेट में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए। वैशाली जिले में 400 एकड़ जमीन पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। वहीं पटना के बिहटा में डेयरी प्लांट लगाने के लिए करीब 97 करोड़ रुपये के निजी निवेश को मंजूरी मिली है। इस परियोजना से लगभग 170 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
कैबिनेट के बैठक में वित्त विभाग से जुड़े कुछ अन्य एजेंडों पर भी मुहर लगाई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार द्वारा 64,141.2820 करोड़ रुपये बाजार ऋण सहित कुल 72,901.3907 करोड़ रुपये के ऋण उगाही को स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार ने मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना को मंजूरी दी है। योजना का मुख्य उद्देश्य वाहनजनित प्रदूषण कम करना और वर्ष 2030 तक नए वाहनों की कुल बिक्री में कम-से-कम 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। यह वैश्विक "ईवी 30एट30" अभियान को भी सहयोग देगा।
राज्य सरकार ने बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2023 की कई धाराओं में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया वाणिज्यिक वाहन, दोपहिया तथा महिलाओं के लिए चारपहिया गैर-वाणिज्यिक वाहनों की खरीद और निबंधन पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी।