बिहार में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार 6 मई को नए मंत्रियों को शपथ दिलाने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल साफ तौर पर देखी जा रही है।
मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर प्रमुख गठबंधन दलों के बीच सहमति बनने की खबर है। जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच लगभग बराबरी का संतुलन साधते हुए मंत्रियों की संख्या तय की जा रही है। बीजेपी से करीब 13 और जेडीयू से लगभग 12 विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं, सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की योजना है; लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो सीटें मिल सकती हैं, जबकि हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक-एक पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी अपने संभावित मंत्रियों के नामों पर 1 मई तक अंतिम निर्णय ले सकती है। इसके बाद सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी, जिससे आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके। शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारी भी जोरों पर है, और इसमें वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति की संभावना व्यक्त की जा रही है। प्रशासन सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पहले से ही सतर्क नजर आ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार केवल शासन संचालन को मजबूती देने के लिए नहीं, बल्कि गठबंधन की एकता और संतुलन का संदेश देने के लिए भी अहम साबित होगा। ऐसे में यह कदम आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।