झारखंड के राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी समीकरणों के बीच भाजपा के एक बड़े फैसले ने मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। पार्टी ने इस बार अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारने का निर्णय लिया है और अब निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में खुलकर समर्थन की रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व की ओर से पार्टी विधायकों के साथ-साथ सहयोगी दलों के जनप्रतिनिधियों को भी नाथवानी के समर्थन में सक्रिय होने का संदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तावक के तौर पर भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा से जुड़े कुछ विधायक भूमिका निभा सकते हैं।
नाथवानी 8 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। जानकारी के अनुसार, वे दिल्ली से रांची लौट रहे हैं और देर रात तक उनके पहुंचने की संभावना है। इससे पहले राजनीतिक स्तर पर कई दौर की चर्चाओं के बाद उनकी उम्मीदवारी को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं।
भाजपा के समर्थन के बाद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि नाथवानी की दावेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। विधानसभा के मौजूदा अंकगणित को देखते हुए उनकी जीत की राह आसान होती दिख रही है और उन्हें अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
वहीं कांग्रेस के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। पार्टी अपने प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में विधायकों को एकजुट रखने की कवायद में जुटी है। चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा अब क्रॉस वोटिंग रोकने और संख्या बल बनाए रखने पर केंद्रित माना जा रहा है।
इसी बीच मुख्यमंत्री आवास पर INDIA गठबंधन की बैठक भी जारी है, जहां राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक चर्चा हो रही है। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल और अजय शर्मा की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है।