बाढ़ की खोभिया लाई, बड़हिया के रसगुल्ला और तिलकुट को GI टैग देने की मांग विधानसभा में गूंजी, खूब हुई हंसी ठिठोली

बिहार विधानसभा का माहौल उस समय दिलचस्प हो गया जब बाढ़ से विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने अपने क्षेत्र की प्रसिद्ध “खोभिया लाई” को जीआई टैग (GI Tag Politics) दिलाने का मुद्दा उठाया

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 23, 2026, 1:28:00 PM

बिहार विधानसभा का माहौल उस समय दिलचस्प हो गया जब बाढ़ से विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने अपने क्षेत्र की प्रसिद्ध “खोभिया लाई” को जीआई टैग (GI Tag Politics) दिलाने का मुद्दा उठाया। सामान्यतः गंभीर राजनीतिक बहसों के लिए पहचाने जाने वाले सदन में इस बार चर्चा का केंद्र विकास योजनाएं या बजट नहीं, बल्कि पारंपरिक मिठाइयाँ बन गईं। देखते ही देखते बाढ़ की लाई, गयाजी का तिलकुट और बड़हिया का रसगुल्ला जैसे स्थानीय स्वाद राज्यस्तरीय पहचान की बहस में शामिल हो गए।

बाढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. सियाराम सिंह ने कहा कि बाढ़ की “खोभिया लाई” सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह देश के कई पारंपरिक उत्पादों को GI टैग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, उसी तरह बाढ़ की लाई को भी संरक्षण और ब्रांड वैल्यू मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि यह मिठाई दशकों से स्थानीय कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक तकनीक का प्रतीक रही है, इसलिए इसे कानूनी संरक्षण मिलना आवश्यक है।

 इस पर जवाब देते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि आवेदन किया गया है। चेन्नई भेजी गई है। सरकार प्रयासरत है कि जल्द से जल्द बाढ़ की लाई मिठाई को जीआई टैग मिल जाए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने गया के तिलकुल को भी जीआई टैग दिलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया है

मामला दिखवा लें। इसके बाद डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने मंत्री दिलीप जायसवाल से मजाकिया अंदाज में कहा कि आप बढ़ैया का रसगुल्ला तो खाते हैं लेकिन उसे जीआई टैग नहीं दिलवा रहे हैं। हंसते हुए दिलीप जायसवाल ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि विजय बाबू ने आज तक रसगुल्ला नहीं खिलाया है। लेकिन, फिर भी मैं जीआई टैग के लिए इसे देख रहा हूं। उन्होंने सभी विधायकों से अपील करते हुए कहा कि आपके इलाके की जो भी चीजें जीआई टैग के लिए उपयुक्त लगे, उसके लिए आवेदन कर दें।  

इसके बाद मानो पूरे सदन में ‘मिठाई अभियान’ शुरू हो गया। अलग-अलग क्षेत्रों के विधायकों ने अपने-अपने इलाके की प्रसिद्ध मिठाइयों जैसे तिलकुट, अनारसा, रस्कदम, लड्डू और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का उल्लेख करते हुए उन्हें GI टैग दिलाने की मांग रखी