असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो नेता कल्पना सोरेन ने शुक्रवार को पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी अभियान को धार दी। दोनों नेताओं ने रैलियों के माध्यम से राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सामाजिक विभाजन और आदिवासी समुदाय की उपेक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
सभा को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि असम की वर्तमान सरकार समाज को बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि यहां आदिवासियों को आपस में और विभिन्न धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इन समुदायों ने अपनी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी, लेकिन बदले में उन्हें सम्मानजनक जीवन, उचित मजदूरी और बुनियादी अधिकार नहीं मिल पाए।
हेमंत सोरेन ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि वे आगामी 9 अप्रैल को झामुमो उम्मीदवार पबन सोतल के पक्ष में मतदान कर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करें। उन्होंने इसे बदलाव का अवसर बताते हुए वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया।
वहीं, कल्पना सोरेन ने अपने संबोधन में चाय बागान मजदूरों और आदिवासी समाज के मुद्दों को केंद्र में रखा। उन्होंने न्यूनतम दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 350 रुपये करने और महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया। साथ ही उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर लंबे समय से लंबित आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
कल्पना सोरेन ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान की बहाली का संघर्ष है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर अपने भविष्य और अधिकारों के लिए मतदान करने की अपील की।