आलमगीर आलम पर भाजपा के आरोपों को कांग्रेस ने बताया राजनीतिक द्वेष, BJP की नैतिकता पर उठाये सवाल

आलमगीर आलम पर भाजपा के आरोपों को कांग्रेस ने बताया राजनीतिक द्वेष, BJP की नैतिकता पर उठाये सवाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 14, 2026, 6:13:00 PM

झारखंड में सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा पर दोहरे राजनीतिक मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार और नैतिकता के मुद्दे पर विश्वसनीयता खो चुकी है।

आलोक दूबे ने कहा कि भाजपा का राजनीतिक व्यवहार ऐसा बन गया है जिसमें विपक्षी दलों के नेताओं पर पहले गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन वही नेता भाजपा में शामिल होते ही “स्वच्छ” घोषित कर दिए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की राजनीति अब वैचारिक नहीं बल्कि अवसरवादी मॉडल पर आधारित हो चुकी है।

कांग्रेस नेता ने वर्ष 2001 के तहलका स्टिंग ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद होने की घटना देश के सामने थी, फिर भी भाजपा खुद को नैतिक राजनीति का प्रतीक बताती रही है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कभी इन नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, लेकिन पार्टी में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक चरित्र बदलकर प्रस्तुत किया गया। दूबे ने सवाल किया कि क्या दल बदलते ही आरोप स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

आलोक दूबे ने झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम को न्यायालय से राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अदालतों के फैसलों पर सवाल खड़ा करना लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति असम्मान दर्शाता है। उनके मुताबिक, पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में आलमगीर आलम की पत्नी की बड़ी जीत इस बात का संकेत है कि जनता ने भाजपा के आरोपों को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने आलमगीर आलम को लंबे समय से सामाजिक सौहार्द और जनसंघर्ष से जुड़े नेता के रूप में पेश करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाना बनाया जा रहा है। दूबे ने यह भी उल्लेख किया कि आलमगीर आलम के निजी सचिव पूर्व में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सीपी सिंह के साथ भी काम कर चुके हैं।

कांग्रेस महासचिव ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई और आयकर विभाग की अधिकांश कार्रवाई विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रित रही है। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि दोष सिद्ध होने के मामलों की संख्या बेहद सीमित है।

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया का हवाला देते हुए आलोक दूबे ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल में स्पष्ट किया था कि वे केवल औपचारिक सहमति देने की भूमिका नहीं निभा सकते। दूबे के अनुसार, यह बयान केंद्र सरकार और स्वतंत्र संस्थाओं के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाता है।

अपने बयान के अंत में उन्होंने भाजपा से महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय बढ़ाने, काला धन वापस लाने और रोजगार सृजन जैसे पुराने चुनावी वादों पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता अब राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर वास्तविक मुद्दों पर जवाब चाहती है।