फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपनी डेटा शेयरिंग नीति में बड़ा बदलाव किया है और अब ग्राहकों के फोन नंबर रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने का निर्णय लिया है। इस फैसले ने उद्योग जगत और राजनीतिक महौल में बहस को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के बाद उपभोक्ताओं के मोबाइल पर प्रमोशनल मैसेज की संख्या में तेजी से वृद्धि हो सकती है।
अब तक Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी को छुपा कर रखते थे, जिससे रेस्टोरेंट्स को फोन नंबर या अन्य डेटा नहीं मिल पाता था। लेकिन Zomato ने एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें यूजर्स को पॉप-अप नोटिफिकेशन के माध्यम से पूछा जाएगा कि क्या वे रेस्टोरेंट्स को प्रमोशनल संदेश भेजने की अनुमति देते हैं। इस पॉप-अप में स्पष्ट लिखा गया है कि अनुमति देने के बाद इसे वापस नहीं लिया जा सकता। इसका मतलब है कि ग्राहक का नंबर भविष्य में किसी भी मार्केटिंग गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
रेस्टोरेंट उद्योग लंबे समय से डेटा मास्किंग की नीति से परेशान था क्योंकि इसके कारण वे सीधे ग्राहकों से संपर्क नहीं कर पाते थे। रेस्टोरेंट्स का कहना है कि अगर उन्हें ग्राहकों के नंबर मिलें तो वे खाना और डिलीवरी से जुड़ी शिकायतों को सीधे सुलझा सकते हैं और टारगेटेड मार्केटिंग के जरिए ग्राहक की पसंद और स्वाद को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इस मुद्दे पर नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने Zomato और Swiggy के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार की शिकायत भी प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में दर्ज कराई थी।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने Zomato के इस कदम को गोपनीयता के लिए खतरा बताया है। उनका मानना है कि अगर फोन नंबर साझा किए गए तो मार्केटिंग कॉल्स, ऑफ़र्स और प्रमोशनल मैसेज की भारी बाढ़ आ सकती है।