Zomato के CEO दीपेंद्र गोयल का खुलासा, बोले- खाने में बाल डालकर पैसे वापस मांगते हैं लोग…

Zomato के CEO दीपेंद्र गोयल ने खुलासा किया है कि डिलीवरी राइडर ही नहीं बल्कि ग्राहक भी कंपनी को धोखा देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया है कि कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक खुद अपनी तरफ से खाने में बाल डालकर फोटो क्लिक करते हैं

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 08, 2026, 1:26:00 PM

Zomato के CEO दीपेंद्र गोयल ने खुलासा किया है कि डिलीवरी राइडर ही नहीं बल्कि ग्राहक भी कंपनी को धोखा देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया है कि कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक खुद अपनी तरफ से खाने में बाल डालकर फोटो क्लिक करते हैं और कंपनी से रिफंड मांगने हैं। इतना ही नहीं, ग्राहक एआई के जरिए खराब खाने की फोटो बनवाते हैं और क्लेम करते हैं कि वह उन्हें जोमोटे के जरिए मिला है। ग्राहक कंपनी के साथ इस तरह के फ्रॉड करके पैसे वापस मांगते हैं। 

वहीं, डिलीवरी पार्टनर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि ऑर्डर डिलीवर ना करके या कैश ऑन डिलीवरी में गड़बड़ी करके भी कंपनियों के साथ धोखाधड़ी की जाती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए जोमैटो 'कर्मा स्कोर' सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यह ग्राहक और राइडर दोनों के पिछले रिकॉर्ड को देखता है और उसके आधार पर फैसला लेता है

दीपेंद्र गोयल ने बताया कि कैसे ग्राहक ऑनलाइन खाना ऑर्डर करके कंपनी के साथ फ्रॉड करते हैं। गोयल के अनुसार, ग्राहक खाने में जानबूझकर बाल डाल देते हैं और फिर रिफंड के लिए शिकायत करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आजकल AI का इस्तेमाल करके भी धोखाधड़ी की जा रही है। AI के जरिए मक्खी, कीड़े या नाखून जैसी चीजें खाने में दिखाई जाती हैं। ये फोटो Raj Shamani के यूट्यूब से ली गई है।

गोयल ने कहा अचानक से 5 प्रतिशत केक स्मैश बढ़ गए हैं, ये कैसे हो रहा है। उन्होंने बताया कि AI की मदद से ग्राहक केक को जानबूझकर मैश दिखाते हैं और रिफंड मांगते हैं। एआई की मदद से अस तरह की फोटोज आसानी से बनाई जा सकती हैं और इन्हें पहचानना भी मुश्किल होता है।

ग्राहकों और डिलीवरी राइडर्स के बीच होने वाले झगड़ों को सुलझाने के लिए जोमैटो एक खास 'कर्मा स्कोर' सिस्टम का इस्तेमाल करता है। यह सिस्टम ग्राहक और राइडर दोनों के पिछले रिकॉर्ड और व्यवहार को ट्रैक करता है। गोयल ने माना कि यह तय करना अक्सर मुश्किल होता है कि गलती किसकी है। उन्होंने कहा हम कभी भी पूरी तरह से सही नहीं हो सकते। अगर कोई विवाद होता है, तो जोमैटो उस व्यक्ति का पक्ष लेता है, जिसका 'कर्मा स्कोर' बेहतर होता है। इसका मतलब है कि ग्राहक या फिर डिलीवरी पार्टनर में से जिसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा होगा, उसको सही माना जाएगा।।

गोयल ने बताया कि करीब 50-70% मामलों में जोमैटो खुद नुकसान उठाता है। इसका मतलब है कि वे राइडर को नौकरी पर बनाए रखते हैं और साथ ही ग्राहक को रिफंड भी दे देते हैं। उन्होंने समझाया कि अगर किसी डिलीवरी राइडर के खिलाफ बार-बार शिकायतें आती हैं और यह पैटर्न साफ दिखता है तभी उन्हें नौकरी से निकाला जाता है। किसी एक घटना के आधार पर किसी को नहीं निकाला जाता।