पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के बहुचर्चित आंतरिक रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गणना का कार्य सोमवार से कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच प्रारंभ हो गया। लगभग पांच दशकों के अंतराल के बाद हो रही इस प्रक्रिया को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के पश्चात विशेषज्ञों की टीम को भंडार के भीतर प्रवेश दिया गया। इस टीम में मंदिर से जुड़े पारंपरिक जौहरी, विभिन्न सरकारी बैंकों के विशेषज्ञ, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि तथा रत्नों के जानकार शामिल हैं। इन सभी की जिम्मेदारी भंडार में सुरक्षित रखे गए आभूषणों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनका वजन दर्ज करना है। इस प्रक्रिया के तहत वर्तमान सूची की तुलना वर्ष 1978 में तैयार किए गए आधिकारिक रिकॉर्ड से की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी वस्तुएं सुरक्षित और यथावत हैं। पूरी कार्रवाई को पारदर्शी बनाने के लिए वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई जा रही है। आगे चलकर प्रत्येक आभूषण और रत्न का डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी तस्वीरें और विवरण शामिल होंगे। सरकार ने इस पूरे कार्य को आगामी स्नान यात्रा से पहले पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपलब्ध पुराने आंकड़ों के अनुसार, 1978 में मंदिर के खजाने में कुल 454 प्रकार के आभूषण दर्ज किए गए थे, जिनमें बाहरी और आंतरिक दोनों रत्न भंडार के गहने तथा पूजा में प्रयुक्त आभूषण शामिल थे। इनमें से केवल आंतरिक भंडार में ही 367 प्रकार के स्वर्ण आभूषणों का उल्लेख किया गया था। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, इस चरण में मुख्य रूप से आंतरिक रत्न भंडार की वस्तुओं का ही मिलान पुराने रिकॉर्ड से किया जा रहा है, जबकि इनकी मौद्रिक कीमत का आकलन नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि भंडार में रखे गए बहुमूल्य आभूषणों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, ताकि वे आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित रह सकें। गौरतलब है कि इस व्यापक गणना अभियान का पहला चरण 25 मार्च को शुरू हुआ था। इसके बाद दूसरे चरण में 8 से 11 अप्रैल के बीच बाहरी रत्न भंडार में रखे आभूषणों की गिनती और उनका मूल्यांकन पूरा किया गया। अब तीसरे चरण में आंतरिक भंडार की विस्तृत जांच जारी है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।