जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। आंदोलन खत्म करने की घोषणा केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में प्रवक्ता सौरभ दास तथा आशुतोष रांका ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने की अपील की गई।
आशुतोष रांका ने बताया कि आंदोलन के दौरान सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। उनके मुताबिक, वार्ता के बाद आंदोलनकारियों की तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस लेना और NEET से प्रभावित परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देना शामिल है।
सौरभ दास ने बताया कि सरकार के साथ मांगों को लेकर एक ड्राफ्ट भी साझा किया गया है। सरकार ने इसे लिखित रूप में मंगलवार तक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि NEET से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी है।
प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार के सामने पांच सूत्रीय प्रस्ताव भी रखा गया है। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति और सुधारों को लेकर करीब चार सप्ताह बाद सरकार के साथ दोबारा बैठक होगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे भी बातचीत जारी रहेगी।
वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में उत्साह देखने को मिला। छात्रों ने नारेबाजी करते हुए अपनी एकजुटता जाहिर की और राष्ट्रगान भी गाया। NEET विवाद के दौरान जान गंवाने वाले विद्यार्थियों की स्मृति में प्रदर्शनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।