श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण, हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से लैस अन्वेषा जासूसी सैटेलाइट समेत 15 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित

श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण, हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक से लैस अन्वेषा जासूसी सैटेलाइट समेत 15 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 12, 2026, 11:04:00 AM

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 रॉकेट के जरिए EOS-N1 मिशन का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिशन के तहत अन्वेषा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट के साथ 14 अन्य सह-यात्री (को-पैसेंजर) उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया।

इस मिशन का प्रमुख उपग्रह अन्वेषा है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक अत्याधुनिक निगरानी उपग्रह है, जो उन्नत इमेजिंग तकनीक से लैस है। इसकी खासियत यह है कि यह पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर रहकर भी घने जंगलों, झाड़ियों या बंकरों में छिपी गतिविधियों की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है। इसका उपयोग रणनीतिक निगरानी और उच्च-स्तरीय मैपिंग के लिए किया जाएगा।

EOS-N1 समेत सभी उपग्रहों को सूर्य-समकालिक कक्षा (सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट) में स्थापित किया जा रहा है। अन्वेषा को पृथ्वी से लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर इस कक्षा में तैनात किया जाएगा, जिससे यह एक ही स्थानीय समय पर बार-बार किसी क्षेत्र की तस्वीरें ले सकेगा।

इस मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट लॉन्च किए गए हैं, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी उपग्रह शामिल हैं। भारतीय उपग्रहों में हैदराबाद की निजी अंतरिक्ष कंपनी ध्रुवा स्पेस के 7 सैटेलाइट शामिल हैं। वहीं विदेशी उपग्रह फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम से संबंधित हैं।

EOS-N1 मिशन वर्ष 2026 में इसरो का पहला सैटेलाइट प्रक्षेपण है। इसे न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित किया गया, जो इसरो की व्यावसायिक इकाई है। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के निर्माण और प्रक्षेपण से जुड़ा नौवां व्यावसायिक मिशन भी है। इस मिशन को भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार किसी घरेलू निजी कंपनी की PSLV मिशन में इतनी व्यापक भागीदारी रही है।

अन्वेषा सैटेलाइट ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ (HRS) तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक सामान्य उपग्रहों की तुलना में प्रकाश के कहीं अधिक स्पेक्ट्रम को पहचानने में सक्षम होती है। जहां पारंपरिक सैटेलाइट कुछ सीमित रंगों को पकड़ते हैं, वहीं अन्वेषा सैकड़ों सूक्ष्म रंगों को डिटेक्ट कर सकता है। इससे जमीन पर मौजूद मिट्टी, वनस्पति, संरचनाओं और मानवीय गतिविधियों की पहचान अत्यंत सटीक तरीके से संभव हो पाती है।

यह प्रक्षेपण PSLV रॉकेट की कुल 64वीं उड़ान थी। PSLV को दुनिया के सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यानों में गिना जाता है और इसी रॉकेट के माध्यम से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए हैं। इससे पहले PSLV-C61 मिशन मई 2025 में EOS-09 सैटेलाइट के साथ उड़ान पर गया था, हालांकि तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण वह मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था।

हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च करने वाले देशों की सूची में भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान शामिल हैं। भारत ने पहली बार 29 नवंबर 2018 को HySIS नामक हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट लॉन्च किया था, जिसका वजन 380 किलोग्राम था और जो 55 स्पेक्ट्रल बैंड्स में काम करता था। अन्वेषा उसी का उन्नत संस्करण है, जिसमें कहीं अधिक संवेदनशील और व्यापक हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता जोड़ी गई है।