केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद नव निर्वाचित मणिपुर सरकार ने राज्य में सुरक्षा एजेंसियों को तलाशी अभियानों में तेजी लाने के आदेश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के साथ-साथ हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी को प्राथमिकता दी जाए।
सरकारी निर्देशों के बाद मणिपुर पुलिस और असम राइफल्स ने पिछले 48 घंटों के भीतर राज्य के दो अलग-अलग इलाकों में संयुक्त अभियान चलाकर हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा भंडार बरामद किया है। असम राइफल्स के अधिकारियों ने बताया कि पहली बड़ी बरामदगी रविवार को की गई।
काकचिंग जिले के पल्लेल इलाके में चलाए गए तलाशी अभियान में सुरक्षा बलों ने एके-47 राइफल, एक पिस्तौल, दो इम्प्रोवाइज्ड मोर्टार, एक सिंगल बैरल राइफल, 14 आईईडी, दो जिंदा मोर्टार बम, 7.62 एमएम के दस राउंड समेत अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की। असम राइफल्स के प्रवक्ता के मुताबिक, इस ऑपरेशन में ड्रोन, मेटल डिटेक्टर और डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई, जिसके जरिए हथियारों और विस्फोटकों के ठिकाने तक पहुंचा जा सका।
इसी क्रम में सोमवार को एक अन्य स्थान पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। इम्फाल पूर्व जिले के नोंगडैम क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने दो सिंगल बैरल राइफल, एक .303 राइफल, मैगजीन के साथ चार 9 एमएम पिस्तौल और 36 हैंड ग्रेनेड बरामद किए। प्रवक्ता ने बताया कि बरामद हथियारों को मणिपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया, जबकि आईईडी को मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया गया।
राज्य में लंबे समय से जारी अशांति के बाद लोकप्रिय सरकार के गठन के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने नशीले पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में कांगपोकपी जिले के शोंगलोंग इलाके में असम राइफल्स, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए करीब सात एकड़ में फैले दो अफीम के खेत नष्ट किए।
अधिकारियों के अनुसार, इन खेतों से लगभग 50 किलोग्राम अफीम बरामद हुई है, जिसकी बाजार कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। रविवार को हुए इस अभियान के दौरान नशीली दवाएं तैयार करने में उपयोग होने वाली सामग्री रखने के लिए बनाई गई एक अस्थायी झोपड़ी को भी ध्वस्त कर दिया गया। मौके से एक बर्मी केनबो मोटरसाइकिल भी जब्त की गई।
इस बीच मैतेई एलायंस (मेतैई डायस्पोरा संगठन) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि मणिपुर में गैर-कानूनी अफीम की खेती को राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संकट के रूप में घोषित किया जाए।
संगठन ने प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी आग्रह किया कि अवैध खेती को समय पर समाप्त करने के लिए सुरक्षा, खुफिया, वन और राजस्व विभागों को जोड़ते हुए एकीकृत केंद्रीय टास्क फोर्स का गठन किया जाए।
साथ ही मैतेई एलायंस ने भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी और प्रबंधन को और सख्त बनाने की अपील की। संगठन का दावा है कि राज्य के पहाड़ी इलाकों में अवैध अफीम की खेती और सीमा पार से ड्रग तस्करी ने वर्षों से चल रहे संकट को बढ़ावा दिया है और इससे एक ‘नार्को इकोनॉमी’ विकसित हुई है, जो जातीय तनाव को हवा देती है।
गौरतलब है कि मणिपुर की म्यांमार के साथ लगभग 398 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो अधिकतर हिस्सों में खुली मानी जाती है। यही कारण है कि यह इलाका ड्रग तस्करी के लिए संवेदनशील बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र की म्यांमार ओपियम सर्वे 2025 रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार में अफीम की खेती में बीते वर्ष 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह 2024 में 45,200 हेक्टेयर से बढ़कर 2025 में 53,100 हेक्टेयर तक पहुंच गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा 2023 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वहां अफीम उत्पादन में करीब 95 प्रतिशत गिरावट आई, जिसके बाद म्यांमार अवैध अफीम का दुनिया में प्रमुख स्रोत बन गया है।
राज्य में अब सुरक्षा एजेंसियां हथियारों की तस्करी और नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई कर रही हैं, जिसे आने वाले दिनों में और तेज किए जाने की संभावना है।