बैंकों की ‘मिस-सेलिंग’ पर RBI की सख्ती, बीमा-म्यूचुअल फंड बेचने के नियम होंगे कड़े

बैंकों की ‘मिस-सेलिंग’ पर RBI की सख्ती, बीमा-म्यूचुअल फंड बेचने के नियम होंगे कड़े

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 12, 2026, 2:58:00 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर में ग्राहकों के साथ होने वाली वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर रोक लगाने के लिए नए कड़े नियमों का मसौदा तैयार किया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब ग्राहकों को दबाव डालकर या भ्रमित करके बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य थर्ड पार्टी प्रोडक्ट बेचना आसान नहीं होगा।

RBI के प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, बैंकों के सेल्स और मार्केटिंग से जुड़े कर्मचारियों को किसी भी बाहरी कंपनी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई इंसेंटिव, कमीशन या बोनस नहीं दिया जा सकेगा। अब तक कई मामलों में कर्मचारियों को अधिक बिक्री के बदले अतिरिक्त लाभ मिलता था, जिससे ग्राहकों को उनकी जरूरत के बिना भी प्रोडक्ट लेने के लिए प्रेरित या मजबूर किया जाता था।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ पर भी कार्रवाई

ड्राफ्ट नियमों में RBI ने बैंकों की डिजिटल सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ को भी निशाने पर लिया है। ये ऐसे भ्रामक डिज़ाइन होते हैं जिनसे ग्राहक अनजाने में किसी सेवा या प्रोडक्ट के लिए हामी भर देता है।
उदाहरण के तौर पर—पहले से टिक किए गए विकल्प, छिपे हुए शुल्क, या उलझाने वाली भाषा। RBI ने इसे उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ बताते हुए रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है।

RBI ने साफ किया है कि बैंक अपने किसी मुख्य उत्पाद के साथ थर्ड पार्टी प्रोडक्ट को अनिवार्य रूप से जोड़कर नहीं बेच सकेंगे। यदि लोन या बैंक खाते के साथ बीमा जरूरी भी हो, तो ग्राहक को यह स्वतंत्रता होगी कि वह बीमा किसी भी कंपनी से ले सकता है। बैंक अपनी पसंद की कंपनी थोप नहीं पाएंगे।

मसौदे के मुताबिक, यदि जांच में यह प्रमाणित हो जाता है कि ग्राहक को गलत जानकारी देकर या दबाव डालकर कोई प्रोडक्ट बेचा गया है, तो बैंक को ग्राहक की पूरी रकम वापस करनी होगी। साथ ही ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई भी बैंक को करनी पड़ेगी।

ग्राहक संबंधित वित्तीय नियामक द्वारा तय समयसीमा में बैंक में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जहां कोई समयसीमा निर्धारित नहीं है, वहां ग्राहक को शर्तों की हस्ताक्षरित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर शिकायत करने का अधिकार होगा।

30 दिनों में ग्राहक से फीडबैक लेना होगा अनिवार्य

RBI ने बैंकों को निर्देशित किया है कि किसी भी वित्तीय उत्पाद की बिक्री के बाद 30 दिनों के भीतर ग्राहक से फीडबैक लिया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को उत्पाद की शर्तें, जोखिम और जरूरी जानकारी सही तरीके से समझ में आई है या नहीं।

बैंकों को इस फीडबैक के आधार पर हर छह महीने में रिपोर्ट तैयार करनी होगी और अपनी आंतरिक नीतियों की समीक्षा करनी होगी।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों पर ऐसे बिक्री लक्ष्य या प्रतियोगिताओं का दबाव नहीं बनाया जाए, जिससे वे ग्राहकों पर अनावश्यक उत्पाद खरीदने का दबाव डालें। RBI का संदेश स्पष्ट है कि “टारगेट पूरा करने” के नाम पर गलत बिक्री की छूट नहीं दी जाएगी।

डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स के लिए भी नई गाइडलाइन

ड्राफ्ट नियमों में डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स (DSAs) को लेकर भी आचार संहिता प्रस्तावित की गई है। इसके तहत:

  • ग्राहक से फोन या मुलाकात सामान्यतः सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही की जा सकेगी।

  • तय समय के बाहर संपर्क करने के लिए ग्राहक की पूर्व सहमति जरूरी होगी।

  • RBI के ये प्रस्तावित नियम बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों को गलत बिक्री से बचाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो बैंकों द्वारा बिना जरूरत प्रोडक्ट थमाने की शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हो सकता है।