पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश...', सुप्रीम कोर्ट ने पलटा HC का फैसला, अदालत को फटकार भी लगाई

Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा खींचना और उसके ब्रेस्ट को पकड़ना केवल ‘तैयारी’ नहीं, बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 18, 2026, 6:51:00 PM

Supreme Court of India ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा खींचना और उसके ब्रेस्ट को पकड़ना केवल ‘तैयारी’ नहीं, बल्कि रेप की कोशिश माना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में Allahabad High Court के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें इन हरकतों को रेप की तैयारी बताया गया था।

चीफ जस्टिस Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने आपराधिक कानून के स्थापित सिद्धांतों का गलत प्रयोग किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरोपियों की हरकतें साफ तौर पर रेप की कोशिश की ओर इशारा करती हैं और पहली नजर में शिकायतकर्ता तथा अभियोजन ने ‘अटेंप्ट टू रेप’ का मामला बना दिया है।

दरअसल, 17 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपी की करतूतें रेप या रेप की कोशिश की श्रेणी में नहीं आतीं और ‘अटेंप्ट टू रेप’ की धारा हटाने का निर्देश दिया था। इस फैसले के सामने आते ही देशभर में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 25 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी केवल इसलिए अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए, क्योंकि पीड़िता की चीख सुनकर लोग मौके पर पहुंच गए थे। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर हस्तक्षेप नहीं होता, तो अपराध और गंभीर हो सकता था।

यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा और आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी हरकतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और कानून की नजर में यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।