केंद्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में सांस्कृतिक बदलाव करते हुए कई प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों के नाम बदल दिए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। देशभर में स्थित राज्य भवनों का नया नाम ‘लोक भवन’, जबकि केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ तय किया गया है।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नामों का नहीं, बल्कि "सत्ता से सेवा" की सोच की ओर बढ़ने का प्रतीक है। पहले भी राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ नाम दिया गया था और प्रधानमंत्री निवास का नाम रेस कोर्स रोड से बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया था।
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘राज भवन’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले वर्ष राज्यपाल सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसके बाद निर्णय लिया गया कि राज्यपालों और उप-राज्यपालों के आवास तथा कार्यालय अब क्रमशः ‘लोक भवन’ और ‘लोक निवास’ नाम से जाने जाएंगे।
पीएम मोदी का दफ्तर अब साउथ ब्लॉक से निकलकर आधुनिक सुविधाओं से लैस नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित होगा। यह परिसर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना का प्रमुख हिस्सा है। हाल ही में कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सेवा तीर्थ-2 में सेना प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की थी
सेवा तीर्थ-1 : प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
सेवा तीर्थ-2 : कैबिनेट सचिवालय
सेवा तीर्थ-3 : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का दफ्तर
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। इसमें नया संसद भवन, विभिन्न मंत्रालयों को एक जगह लाने के लिए केंद्रीय सचिवालय, प्रधानमंत्री एवं उपराष्ट्रपति आवास जैसी कई महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण शामिल है।
यह परियोजना सितंबर 2019 में घोषित की गई थी और 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आधारशिला रखी। सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 20,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। कर्तव्य पथ के दोनों ओर का क्षेत्र ही सेंट्रल विस्टा कहलाता है।