पीएम मोदी ने सदन में याद किया वंदे मातरम् का संघर्ष और बलिदान से भरा इतिहास

पीएम मोदी ने सदन में याद किया वंदे मातरम् का संघर्ष और बलिदान से भरा इतिहास

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 08, 2025, 2:31:00 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रगीत की यात्रा 150 वर्षों में संघर्ष, प्रेरणा और कई ऐतिहासिक घटनाओं से भरी रही है। पीएम मोदी ने बताया कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए थे, उस समय देश ब्रिटिश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, और 100 वर्ष पूरे होने पर देश आपातकाल की जंजीरों में बंधा था। उस दौरान संविधान का गला घोंटा गया और देशभक्तों को जेलों में डाल दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् वह मंत्र था, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरे देश को एकता, वीरता और बलिदान की शक्ति दी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब ब्रिटिश शासन अत्याचार और दमन बढ़ा रहा था, तब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम् के माध्यम से अंग्रेजों के ‘गॉड सेव द क्वीन’ अभियान का सशक्त जवाब दिया। अंग्रेज इतने भयभीत हुए कि उन्हें इस गीत पर प्रतिबंध लगाना पड़ा और इसके प्रकाशन को रोकने के लिए कानून बनाना पड़ा।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् केवल राजनीतिक संघर्ष का नारा नहीं था, बल्कि मां भारती को परतंत्रता से मुक्त कराने का पवित्र संकल्प था। अंग्रेज समझ गए थे कि 1857 के बाद भारत पर शासन आसान नहीं होगा, इसलिए उन्होंने बंगाल को केंद्र बनाकर ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई। ऐसे समय में बंगाल की बौद्धिक शक्ति और वंदे मातरम् का उदय पूरे देश के लिए नई ऊर्जा लेकर आया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष, सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, और गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी है। यह समय भारतीय इतिहास की प्रेरक घटनाओं को याद करने का अवसर प्रदान करता है।

मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् ने 1947 में देश की आजादी दिलाने वाले आंदोलन को दिशा दी। आज जब सदन इस चर्चा में भाग ले रहा है, तो यहां पक्ष–प्रतिपक्ष नहीं हैं, बल्कि यह अवसर है उन ऋणों को स्वीकार करने का, जिनकी वजह से हम लोकतंत्र की इस उच्च संस्था का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष देश और संसद दोनों के लिए गर्व का पुनः प्रदर्शन करने का महत्वपूर्ण अवसर हैं।