प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और सरकारी खर्चों में कटौती की अपील का असर अब कई राज्यों की प्रशासनिक व्यवस्था और वीआईपी संस्कृति पर साफ दिखाई देने लगा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्री अपने काफिलों को छोटा कर रहे हैं, जबकि कुछ राज्यों ने सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी शुरू कर दी हैं।
सबसे बड़ा कदम त्रिपुरा सरकार ने उठाया है। राज्य प्रशासन ने निर्णय लिया है कि ग्रुप ‘C’ और ‘D’ श्रेणी के केवल आधे कर्मचारी ही प्रतिदिन कार्यालय आएंगे। शेष कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि आवश्यक और आपात सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
कई राज्यों में वीआईपी काफिलों को सीमित करने की पहल भी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी स्वयं बुधवार को बेहद सीमित सुरक्षा व्यवस्था के साथ केवल दो वाहनों के काफिले में नजर आए। सामान्य तौर पर उनके काफिले में दर्जनभर से अधिक वाहन शामिल रहते हैं। इसके बाद राज्यों में भी इसी तरह के कदम दिखाई देने लगे।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने जिला दौरों के दौरान अपने काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या आधी करने का फैसला लिया है। उन्होंने मंत्रियों और अन्य वीआईपी व्यक्तियों से भी सरकारी वाहनों का संयमित उपयोग करने की अपील की है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी अपने काफिले को छह वाहनों से घटाकर तीन तक सीमित कर दिया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि उनके साथ अब केवल सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी वाहन ही चलेंगे। साथ ही उन्होंने सप्ताह में एक दिन निजी या सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया है। ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन माझी के काफिले को भी घटाकर चार वाहनों तक सीमित कर दिया गया है, जिनमें दो पुलिस वाहन शामिल हैं।
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले की लंबाई कम करने का निर्देश दिया है। पहले जहां उनके साथ 14 से 16 वाहन चलते थे, वहीं हाल के दिल्ली दौरे में उनके साथ केवल पांच गाड़ियां देखी गईं। मध्य प्रदेश में भी मंत्रियों और वीआईपी मूवमेंट के लिए वाहनों की संख्या नियंत्रित करने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के स्थानीय दौरों में अब पहले की तुलना में कम वाहन शामिल होंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ईंधन बचत को लेकर कई प्रशासनिक फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी अब सीमित वाहनों के साथ यात्रा करेंगे। साथ ही सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने कुछ बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने और सीमित स्तर पर वर्क फ्रॉम होम लागू करने की भी योजना बनाई है।
दिल्ली में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर संदेश देने की कोशिश की। वे मेट्रो से कार्यक्रम स्थल के करीब पहुंचे और आगे की दूरी ई-रिक्शा से तय की। वहीं बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक वाहन से सचिवालय पहुंचे। हालांकि उनके साथ सुरक्षा और अन्य वाहनों का काफिला भी मौजूद था।
पंजाब राजभवन ने भी अनूठी पहल की है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने घोषणा की कि हर बुधवार राजभवन के अधिकारी चार-पहिया वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। महाराष्ट्र में मंत्री आशीष शेलार ने विभागीय खर्चों में कटौती करते हुए इस वर्ष फ्रांस में होने वाले कांस फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।
इन फैसलों को सरकारें ऊर्जा संरक्षण, खर्च नियंत्रण और जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवहार की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम के रूप में पेश कर रही हैं। कई राज्यों में इसे सरकारी मशीनरी में सादगी और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की नई पहल माना जा रहा है।