PM मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ की बड़ी बैठक, पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र-राज्य समन्वय पर दिया जोर

PM मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ की बड़ी बैठक, पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र-राज्य समन्वय पर दिया जोर

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 28, 2026, 12:55:00 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और उसके वैश्विक प्रभावों के बीच भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। इसी परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक कर मौजूदा हालात और संभावित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के भारत पर पड़ने वाले असर का आकलन करना, राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करना और केंद्र-राज्य के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।

बैठक के दौरान ऊर्जा आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में देश को हर स्तर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्यों से कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में किसी प्रकार की बाधा न आने दी जाए और जमाखोरी या कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। साथ ही कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण प्रणाली पर करीबी नजर रखने के निर्देश भी दिए गए।

प्रधानमंत्री ने यह भी आगाह किया कि भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें स्थिति को और जटिल बना सकती हैं, इसलिए सूचना प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। सीमा और तटीय राज्यों को उन्होंने अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और व्यापार से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि यदि केंद्र और राज्य मिलकर “टीम इंडिया” की भावना से काम करें, तो देश किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है। उन्होंने कोविड-19 के बाद के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी एकजुटता और दृढ़ता के साथ सफलता हासिल की है।

बैठक में शामिल कई मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष जताया और कहा कि राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। ईंधन पर करों में राहत और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने के निर्णय का भी स्वागत किया गया।

सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि देश में ऊर्जा संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। भारत के पास लगभग दो महीने का ईंधन भंडार मौजूद है और कच्चे तेल की खरीद विविध स्रोतों से की जा रही है, जिससे आपूर्ति तंत्र स्थिर बना हुआ है। आम जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें।

इस बैठक में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। केंद्रीय स्तर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। वहीं, जिन राज्यों में आचार संहिता लागू है; जैसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी, उनके मुख्यमंत्रियों की जगह मुख्य सचिवों के साथ अलग से विचार-विमर्श किया जाएगा।