अब आंकड़ों के आधार पर होगा शहरों का विकास! NSO तैयार करेगा 47 अर्बन सेंटर की रिपोर्ट, रांची-धनबाद भी शामिल

अब आंकड़ों के आधार पर होगा शहरों का विकास! NSO तैयार करेगा 47 अर्बन सेंटर की रिपोर्ट, रांची-धनबाद भी शामिल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 27, 2026, 11:44:00 AM

देश में तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार अब शहरों के विकास के लिए ठोस और सटीक आंकड़ों पर आधारित रणनीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले 47 प्रमुख शहरों के लिए विस्तृत सिटी-लेवल सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करने की योजना बनाई है। इस सूची में झारखंड के रांची और धनबाद भी शामिल हैं, जो राज्य के आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरी केंद्र माने जाते हैं।

इस पहल का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि शहरों की आर्थिक गतिविधियों, रोजगार की स्थिति और नवाचार क्षमता को गहराई से समझना है, ताकि नीति निर्माण अधिक प्रभावी और साक्ष्य-आधारित हो सके। सरकार का मानना है कि कई शहर तेजी से आर्थिक इंजन के रूप में उभर रहे हैं, लेकिन उनके बारे में विश्वसनीय और विस्तृत डेटा का अभाव योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बनता रहा है।

अब तक अधिकांश आर्थिक सूचनाएं राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर केंद्रित रही हैं, जिससे शहरों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन होता था। उदाहरण के तौर पर, किसी शहर में रोजगार के अवसर किन क्षेत्रों में अधिक हैं या बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति क्या है; इस तरह के सवालों के स्पष्ट उत्तर उपलब्ध नहीं थे। नई पहल के तहत प्रत्येक चयनित शहर को एक अलग इकाई मानते हुए उसका व्यापक विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए आम नागरिकों और विशेषज्ञों से भी सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें 15 मई तक भेजा जा सकता है।

चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 10 शहर शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के 7 शहर, जबकि पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के 2-2 शहर इस सूची का हिस्सा हैं। बिहार से एक शहर को शामिल किया गया है, वहीं झारखंड के दो प्रमुख शहरों को इसमें जगह मिली है।

प्रस्तावित रिपोर्ट को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है। पहले हिस्से में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का रोजगार परिदृश्य तैयार किया जाएगा। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के आधार पर छह प्रमुख संकेतकों का विश्लेषण होगा, जैसे श्रम बल में भागीदारी, कार्यरत आबादी का अनुपात, बेरोजगारी दर और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार का वितरण। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किस सेक्टर में रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

दूसरा हिस्सा असंगठित क्षेत्र पर केंद्रित होगा, जो शहरी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला हिस्सा है। इसमें रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों और छोटे घरेलू उद्योगों जैसे व्यवसायों का अध्ययन किया जाएगा। 13 संकेतकों के आधार पर तैयार होने वाले इस विश्लेषण में प्रतिष्ठानों की संख्या, स्वामित्व का स्वरूप, महिला उद्यमियों की भागीदारी, कर्मचारियों की स्थिति और डिजिटल माध्यमों के उपयोग जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

कुल मिलाकर, इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य शहरों के विकास को नई दिशा देना है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें, आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिले और शहरी जीवन स्तर में समग्र सुधार हो सके।