मकर संक्रांति 2026: तारीख का भ्रम खत्म, जानिए शुभ काल, दान-पुण्य और खरमास के समापन का महत्व

मकर संक्रांति 2026: तारीख का भ्रम खत्म, जानिए शुभ काल, दान-पुण्य और खरमास के समापन का महत्व

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 09, 2026, 10:55:00 AM

हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति को लेकर हर साल लोगों में उत्सुकता रहती है, लेकिन इस बार पर्व की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब पंचांग की स्पष्ट गणना के बाद स्थिति साफ हो गई है। वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी की सुबह ठीक 09:03 बजे धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिस दिन सूर्य मकर राशि में गोचर करता है, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस आधार पर इस वर्ष मुख्य पर्व 14 जनवरी को ही होगा।

स्नान-दान और महापुण्य काल का विशेष संयोग

मकर संक्रांति को दान और स्नान का पर्व माना जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के अगले दिन यानी 15 जनवरी की सुबह महापुण्य काल रहेगा। इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है। इसके बाद पारंपरिक रूप से खिचड़ी का सेवन करना शुभ माना जाता है।

विद्वानों का मत है कि इस अवसर पर काली उड़द, चावल, तिल, गुड़, कंबल और नए वस्त्रों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।

उत्तरायण की शुरुआत

मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है। इसी के साथ एक महीने से चल रहा खरमास भी समाप्त हो जाता है। खरमास के खत्म होते ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाती है।

साल 2026 में 15 जनवरी गुरुवार को पड़ रही है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरुवार का संयोग इस पर्व के महत्व को और बढ़ा देता है तथा इसे उन्नति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।