चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दूसरे चरण के पूरा होने के साथ ही कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों में व्यापक संशोधन देखने को मिला है। इस प्रक्रिया के तहत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 6.08 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
इस संशोधन अभियान की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। उस समय इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 51 करोड़ थी, जो अब घटकर 44.92 करोड़ रह गई है। यह बदलाव मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
दूसरे चरण में जिन प्रमुख राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा शामिल हैं। इसके अलावा पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में भी अंतिम सूची प्रकाशित की गई है।
उत्तर प्रदेश में इस संशोधन का सबसे बड़ा असर देखा गया, जहां मतदाताओं की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। राज्य में लगभग 2.04 करोड़ नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 13.39 करोड़ रह गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं, जहां लगभग 90 लाख से अधिक मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए।
चुनाव आयोग ने बताया कि यह अभियान 24 जून 2025 को देशभर में लागू किया गया था। अब तक इस प्रक्रिया के तहत 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जा चुका है। पहले चरण में बिहार और दूसरे चरण में अन्य राज्यों में यह कार्य पूरा किया गया, जबकि असम में अलग से विशेष पुनरीक्षण अभियान फरवरी 2025 में संपन्न किया गया था।
हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान कुछ राज्यों में राजनीतिक विवाद भी सामने आए। विशेषकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विभिन्न दलों ने इस पुनरीक्षण को लेकर आपत्ति जताई और मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। इसके चलते कई जगहों पर कार्यक्रम में बदलाव भी करना पड़ा।
अब तक देश के लगभग 99 करोड़ मतदाताओं में से करीब 60 करोड़ को इस अभियान के दायरे में लाया जा चुका है। शेष 39 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए तीसरे चरण की तैयारी की जा रही है, जिसमें 17 राज्य और 5 केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे। यह चरण आगामी विधानसभा चुनावों के बाद शुरू किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी के अंत तक लगभग 63.66 लाख नाम हटाए जा चुके थे, जिससे मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी। बाद की जांच और प्रक्रियाओं के बाद कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर करीब 90.83 लाख तक पहुंच गई।
चुनाव आयोग का कहना है कि इस व्यापक पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत हो सके।