ईरान का युद्धपोत IRIS देना हिंद महासागर में डूबने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। यह फ्रिगेट पूर्वी भारत के एक बंदरगाह से लौटकर अपने देश जा रहा था, तभी इसे टॉरपीडो हमले का निशाना बनाए जाने का दावा किया गया। बताया जा रहा है कि यह घटना खाड़ी क्षेत्र से काफी दूर हिंद महासागर में हुई।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में बयान देते हुए कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया। उनके मुताबिक, जहाज को लगा कि वह खुले समुद्र में सुरक्षित है, लेकिन कुछ ही पलों में वह हमले का शिकार हो गया। उन्होंने इस घटना को “शांत मौत” करार दिया।
इस घटना से कुछ दिन पहले ही IRIS देना भारतीय नौसेना के बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलान 2026’ में भाग लेने के लिए विशाखापत्तनम पहुंचा था। यहां ईरानी नौसैनिकों ने कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ अभ्यास में हिस्सा लिया और संयुक्त गतिविधियों में शामिल हुए। भारतीय नौसेना ने भी औपचारिक स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और सामरिक संबंधों का प्रतीक बताया था।
अभ्यास समाप्त होने के बाद यह युद्धपोत बंगाल की खाड़ी से होकर अपने देश लौट रहा था। उस समय वह किसी सैन्य अभियान में शामिल नहीं था, बल्कि एक नियमित वापसी यात्रा पर था। ऐसे में इस हमले ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना श्रीलंका के सर्च एंड रेस्क्यू जोन के करीब हुई, जहां जहाज के डूबने के बाद समुद्र में तेल की परत और मलबा फैल गया। यह इलाका सामान्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक समुद्री गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड ने 17 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर IRIS देना के विशाखापत्तनम आगमन की जानकारी साझा की थी। पोस्ट में कहा गया था कि ईरानी युद्धपोत की यह यात्रा भारत और ईरान के बीच पुराने सांस्कृतिक संबंधों और सहयोग को दर्शाती है। साथ ही युद्धपोत और उसके अधिकारियों की तस्वीरें भी साझा की गई थीं।
इस घटना ने अब यह संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव की गूंज फारस की खाड़ी से काफी दूर हिंद महासागर तक पहुंच चुकी है, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।