झारखंड की पारंपरिक और जनजातीय पाक परंपराओं को अब देशभर में नई पहचान मिलने की तैयारी है। इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) और टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) ने आदिवासी खानपान की विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ जनजातीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करने हेतु साझेदारी की है।
यह सहयोग IHCL के ESG+ आधारित ‘Paathya’ फ्रेमवर्क के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है और TSF के चर्चित आयोजन ‘Samvaad–A Tribal Conclave’ से जुड़ा हुआ है।
इस कार्यक्रम का केंद्र बिंदु जनजातीय क्षेत्रों के होम कुक्स हैं, जिन्हें पारंपरिक व्यंजनों की समझ के साथ आधुनिक प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि पारंपरिक ज्ञान को सम्मान देते हुए उसे व्यवसायिक अवसरों से जोड़ा जाए।
IHCL के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (ह्यूमन रिसोर्सेज) गौरव पोखरियाल ने कहा कि यह पहल आजीविका सशक्तिकरण पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक व्यंजनों को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित न रखकर, उसे कमाई का मजबूत माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है।
5 से 8 फरवरी के बीच मुंबई स्थित ‘Shamiana, Taj The Trees’ में ‘Tales From Tribes’ नाम से आयोजित विशेष शोकेस में झारखंड की संथाल और असुर जनजातियों के पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इस आयोजन में झारखंड के साथ-साथ मेघालय की गारो और राभा जनजातियों के पारंपरिक स्वाद भी शामिल रहे। स्थानीय सामग्री, पारंपरिक विधियों और पीढ़ियों से चली आ रही रेसिपीज़ के जरिए मेहमानों को जनजातीय भोजन संस्कृति का प्रामाणिक अनुभव कराया गया।
ट्राइबल क्यूज़ीन कार्यक्रम बीते तीन वर्षों में 10 राज्यों और 15 जनजातियों के 56 प्रतिभागियों को जोड़ चुका है। रेसिडेंशियल ट्रेनिंग मॉडल के तहत प्रतिभागियों को खाना बनाने की तकनीक, फूड सेफ्टी, पोषण, स्वच्छता और बुनियादी बिजनेस स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई।
कार्यक्रम का लक्ष्य पारंपरिक व्यंजनों को होटल और प्रोफेशनल फूड इंडस्ट्री के मानकों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि जनजातीय होम कुक्स को बड़े बाजार तक पहुंच मिल सके।
इस आयोजन के दौरान प्रतिभागी समुदायों ने अपने पारंपरिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई। इससे आगंतुकों को न केवल आदिवासी भोजन संस्कृति बल्कि झारखंड और अन्य जनजातीय क्षेत्रों की जीवनशैली, कला और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर मिला।
इस नई साझेदारी के जरिए झारखंड, विशेषकर संथाल समुदाय की पाक विरासत को राष्ट्रीय मंच मिलने के साथ-साथ उसे उद्यमिता और रोजगार के नए रास्तों से जोड़ने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।