असम में आदिवासियों की बदहाली पर झारखंड CM नाराज़, कहा-सम्मान और हक जरूरी

असम में आदिवासियों की बदहाली पर झारखंड CM नाराज़, कहा-सम्मान और हक जरूरी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 03, 2026, 2:51:00 PM

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागानों में काम कर रहे आदिवासी समुदाय की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत से असम की चाय उद्योग को खड़ा किया, वही आज बुनियादी अधिकारों और सम्मान से वंचित हैं।

सोरेन ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक जवाबदेही का प्रश्न बताया। उनके अनुसार, बागानों में वर्षों से काम कर रहे आदिवासी श्रमिकों को न तो भूमि का अधिकार मिला है और न ही शिक्षा और सामाजिक बराबरी के अवसर। उन्होंने कहा कि यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल उठाती है।

मुख्यमंत्री ने कुछ प्रचलित शब्दावली पर भी आपत्ति जताई, जिन्हें उन्होंने अपमानजनक और भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय को संकीर्ण पहचान में सीमित करना और उन्हें नीचा दिखाने वाले शब्दों से संबोधित करना, एक पुरानी शोषणकारी सोच को दर्शाता है, जिसे अब समाप्त किया जाना चाहिए।

इतिहास का हवाला देते हुए सोरेन ने कहा कि औपनिवेशिक काल में आदिवासियों को उनके मूल क्षेत्रों; जैसे झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से दूर ले जाकर चाय बागानों में काम के लिए लगाया गया था। उन्होंने खेद जताया कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी इस समुदाय की परिस्थितियों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है और वे आज भी अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं।

सोरेन ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से अपील की कि इस समुदाय को संविधान के तहत मिलने वाले सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने मांग की कि लंबे समय से वहां रह रहे श्रमिकों को भूमि का स्वामित्व दिया जाए, शिक्षा और रोजगार में समान अवसर प्रदान किए जाएं, और आरक्षण जैसे प्रावधानों का लाभ भी उन्हें मिले। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि इतिहास में हुए अन्याय को स्वीकार कर उसे सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।