IndiGo Crisis : आखिर कैसे फेल हुआ इंडिगो का सिस्टम? पूरा मामला जानिये

IndiGo Crisis : आखिर कैसे फेल हुआ इंडिगो का सिस्टम? पूरा मामला जानिये

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Dec 06, 2025, 1:57:00 PM

देश इस समय हवाई यात्रा में बड़े संकट का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के सहारे कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाले आम यात्री इस समय इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों में व्यवधान से परेशान हैं। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने हाल ही में 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे एयरपोर्ट्स पर हालात रेलवे स्टेशनों जैसे हो गए हैं। यात्रियों में भारी अफरा-तफरी है और वे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

संकट के पीछे कई कारण
इंडिगो एयरलाइन लंबे समय से फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या से जूझ रही थी। एयरलाइन ने इसका कारण तकनीकी खराबियों, सर्दियों के मौसम में फ्लाइट टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम की चुनौती बताया। लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियम – फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन – ने स्थिति और गंभीर कर दी। इन नियमों का उद्देश्य पायलटों को थकान से बचाना है, लेकिन इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन के लिए इसे लागू करना मुश्किल साबित हुआ।

नए नियमों का असर
सरकार के नियमों के अनुसार पायलटों को अनिवार्य आराम देना था। पहले से ही स्टाफ की कमी झेल रही इंडिगो के लिए यह नियम अतिरिक्त चुनौती बन गया। कई पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे कर्मचारियों की कमी और बढ़ गई और कई फ्लाइट्स को रद्द करना पड़ा।

एयरबस 320 की चेतावनी से समस्या और बढ़ी
तकनीकी समस्याओं और नए नियमों से जूझ रही इंडिगो को असली झटका तब लगा जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद रात में उड़ानों पर असर पड़ा। रात 12 बजे के बाद नियम लागू होने से कई फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं।

इंडिगो का बड़ा आकार भी चुनौती
भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का संचालन करने वाली इंडिगो का बड़ा नेटवर्क ही संकट का कारण बना। हालांकि, सरकार ने हाल ही में राहत देते हुए कुछ नियमों में ढील दी। डीजीसीए ने पायलटों के साप्ताहिक आराम को छुट्टी में बदलने के नियम को वापस ले लिया, जिससे एयरलाइन को पायलट रोटेशन में सुविधा मिलेगी।

पायलट संघ की नाराजगी
पायलट संघ इंडिगो के प्रबंधन पर नाराज है। उनका कहना है कि एयरलाइन समय रहते नियमों के अनुसार नई भर्ती नहीं कर पाई, जिससे समस्या और बढ़ी। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडिगो ने इस संकट को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की, ताकि नियमों में ढील मिल सके।

यात्रियों को भारी परेशानी
कारण चाहे जो भी हो, संकट का असर सीधे यात्रियों पर पड़ा है। पूरे देश के एयरपोर्ट्स पर भारी भीड़ है, और हर दिन सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं। सरकार का अनुमान है कि 10 फरवरी 2026 तक स्थिति पूरी तरह स्थिर हो सकती है।