केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं का असर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में साफ दिखाई देने लगा है। चालू वित्त वर्ष FY26 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में करीब 38 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस तेज बढ़त में स्मार्टफोन निर्यात की भूमिका सबसे अहम रही।
वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का कुल मूल्य बढ़कर 31 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें एप्पल का योगदान सबसे अधिक रहा। कंपनी ने इसी अवधि में लगभग 14 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन का निर्यात किया, जो देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का 45 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है।
एप्पल की हालिया कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार, FY25 में कंपनी ने भारत के घरेलू बाजार में रिकॉर्ड 9 अरब डॉलर की बिक्री दर्ज की। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर बनने वाले हर पांच में से एक आईफोन का निर्माण या असेंबली भारत में हुई। भारत में तैयार आईफोन्स का योगदान एप्पल के कुल वैश्विक उत्पादन मूल्य का करीब 12 प्रतिशत रहा।
सरकारी आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि बीते एक दशक में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। 2014-15 में जहां इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का मूल्य लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर करीब 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 38 हजार करोड़ रुपये से छलांग लगाकर 3.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच गया।
मोबाइल फोन विनिर्माण के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2014-15 में भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली केवल दो इकाइयां थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर करीब 300 हो चुकी है। मोबाइल फोन उत्पादन 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि निर्यात 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) योजना के तहत 10 राज्यों में बड़े पैमाने पर निवेश का अनुमान लगाया गया है। इन परियोजनाओं से लगभग 1.46 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और करीब 1.80 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस सप्ताह लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि अब तक 11 ईएमसी और दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। ये परियोजनाएं 4,399.68 एकड़ क्षेत्र में फैली हैं, जिनकी कुल लागत 5,226.49 करोड़ रुपये है। इसमें से 2,492.74 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता के रूप में शामिल हैं।
मंत्री के अनुसार, स्वीकृत ईएमसी परियोजनाओं में 123 निर्माताओं द्वारा पहले ही 1.13 लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है। इनमें से नौ इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है, जहां अब तक 12,569.69 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और 13,680 लोगों को रोजगार मिल चुका है।