नेपाल में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद PM बालेन शाह का बड़ा एक्शन, पूर्व पीएम ओली समेत कई नेता गिरफ्तार

नेपाल में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद PM बालेन शाह का बड़ा एक्शन, पूर्व पीएम ओली समेत कई नेता गिरफ्तार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 28, 2026, 1:37:00 PM

नेपाल की राजनीति में नाटकीय घटनाक्रम के बीच नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के पद संभालते ही सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। शपथ ग्रहण के अगले ही दिन नेपाल पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों पर सितंबर 2025 में हुए ‘जनरेशन Z’ प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के मामले में गैर-इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडु स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया, जबकि रमेश लेखक को तड़के सूर्यविनायक इलाके से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद ओली को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया।

यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब हाल ही में हुए जनआंदोलन ने ओली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में बनी सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले में तेजी दिखाते हुए जांच रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया।

दरअसल, इस पूरे मामले की जांच पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग ने की थी। आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान हालात संभालने में गंभीर चूक हुई। खुफिया चेतावनियों के बावजूद समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिससे स्थिति हिंसक होती चली गई और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई।

रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। बताया गया है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित नेताओं को 10 साल तक की सजा हो सकती है। आयोग ने न केवल शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व बल्कि गृह सचिव, पुलिस अधिकारियों और अन्य एजेंसियों के जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है।

जांच में यह भी सामने आया कि करीब चार घंटे तक गोलीबारी जारी रही, लेकिन इसे रोकने के लिए समय पर कोई निर्णायक हस्तक्षेप नहीं हुआ। आयोग ने 9 सितंबर को हुई आगजनी और लूटपाट की घटनाओं की दोबारा गहन जांच करने, साथ ही सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग की भी सलाह दी है। कुछ सुरक्षा बलों और सेना से जुड़े अधिकारियों पर भी लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।

गिरफ्तारी से पहले प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद राजधानी काठमांडू और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में शुरू हुआ ‘Gen Z’ आंदोलन मूल रूप से सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और बढ़ते भ्रष्टाचार के विरोध में था, लेकिन जल्द ही यह हिंसक रूप ले बैठा। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी परिसरों, जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय भी शामिल था, को आग के हवाले कर दिया। हालात बेकाबू होने पर कर्फ्यू लगाया गया, संसद का कामकाज ठप पड़ गया और अंततः तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

इस उथल-पुथल के दौरान 77 लोगों की मौत हुई थी और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ था। अब नई सरकार की इस कार्रवाई को नेपाल में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।