भारतीय सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक उछाल, सोना और चांदी ने छुआ ऑल-टाइम हाई

भारतीय सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक उछाल, सोना और चांदी ने छुआ ऑल-टाइम हाई

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 29, 2026, 5:44:00 PM

भारतीय सर्राफा बाजार के लिए 29 जनवरी 2026 एक यादगार दिन बन गया, जब सोना और चांदी दोनों ने अपने-अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और निवेशकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं की मांग को इस स्तर तक पहुंचा दिया कि कीमतें इतिहास के सर्वोच्च बिंदु पर जा टिकीं।

चांदी ने पहली बार पार किया चार लाख का आंकड़ा

वायदा कारोबार में चांदी ने नया इतिहास रचते हुए ₹4 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर लांघ लिया। MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब ₹4,07,456 प्रति किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग और वैश्विक निवेशकों का सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकाव चांदी की कीमतों को तेजी से ऊपर ले गया।

सोने ने भी बनाया नया कीर्तिमान

सोना भी इस तेजी से अछूता नहीं रहा। MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना लगभग ₹1,80,501 प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर कारोबार करता दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतें 5,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गईं, जिसे अब तक का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है।

वैश्विक माहौल ने बढ़ाई चमक

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक तनाव, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों में बढ़ती दिलचस्पी ने सोने और चांदी दोनों की कीमतों को मजबूत सहारा दिया है। अस्थिर वैश्विक संकेतों के बीच कीमती धातुएं निवेशकों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी हैं।

तेजी के पीछे तीन प्रमुख वजहें

बाजार जानकारों का मानना है कि इस असाधारण उछाल के पीछे तीन बड़े कारण हैं—पहला, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता, जिसने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। दूसरा, कमजोर डॉलर, जिससे कीमती धातुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ती नजर आईं। तीसरा, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीद, जो अपने भंडार को मजबूत करने की रणनीति अपना रहे हैं।

निवेशकों को मिला जबरदस्त लाभ

वर्ष 2026 में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जबकि सोना लगभग 27 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहने की स्थिति में सुरक्षित निवेश की यह दौड़ आगे भी जारी रह सकती है।