गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने गुरुवार को एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये दोनों आरोपी दमन और गोवा क्षेत्रों से भारत की सुरक्षा से जुड़े अहम तथ्य पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों तक पहुंचा रहे थे।
गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान भारतीय सेना के पूर्व सूबेदार अजय कुमार सिंह और दमन की रहने वाली रशमनी पाल के रूप में हुई है। ATS अधिकारियों के अनुसार, दोनों पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स के सीधे संपर्क में थे और संवेदनशील सैन्य इलाकों की गतिविधियों, आर्मी कैंपों की गोपनीय जानकारी तथा सेना की मूवमेंट्स से जुड़े डेटा को साझा कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि पूर्व सूबेदार सिंह, जो पहले इंडियन आर्मी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर कार्य कर चुके थे, ने पाकिस्तान समर्थित एजेंटों को आर्थिक सहायता तक पहुंचाई। गोवा और दमन में एक संयुक्त कार्रवाई के दौरान दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए गुजरात ले जाया गया।
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि जांच का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान-समर्थित एजेंसियों से उनके रिश्तों की गहराई जानना, नेटवर्क में शामिल अन्य तत्वों को पहचानना और यह पता लगाना है कि देश की सुरक्षा संबंधी कौन-कौन सी सूचनाएँ लीक की गईं।
गुजरात एटीएस के एसपी के. सिद्धार्थ ने बताया,
“अजय कुमार सिंह और रशमनी पाल को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अजय कुमार सिंह, जो पहले दीमापुर में सूबेदार थे और वर्तमान में गोवा में सिक्योरिटी ऑफिसर के रूप में काम कर रहे थे, 2022 से पाकिस्तानी ऑपरेटिव ‘अंकिता शर्मा’ के संपर्क में थे। वे सेना की पोस्टिंग और मूवमेंट संबंधी जानकारी साझा कर रहे थे।”
उन्होंने आगे बताया कि सिंह के फोन में ऐसा मैलवेयर डाला गया था जो स्वचालित रूप से संवेदनशील डेटा निकालकर भेज देता था। वहीं दूसरा आरोपी रशमनी, पाक हैंडलर खालिद और अब्दुल सत्तार के संपर्क में थी और महत्वपूर्ण सूचनाएँ उपलब्ध करा रही थी। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि 9 नवंबर को भी गुजरात ATS ने देश भर में आतंकी हमलों की साजिश से जुड़े तीन आरोपियों—अहमद मोहिउद्दीन सैयद, मोहम्मद सुहेल और आज़ाद—को गिरफ्तार किया था।
उनके कब्जे से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा पिस्टल, 30 जिंदा कारतूस और 4 लीटर कैस्टर ऑयल बरामद हुआ था। ATS के मुताबिक, ये तीनों देश के अलग-अलग स्थानों पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और हथियारों की सप्लाई के दौरान ही पकड़े गए।