गिर : एशियाई शेरों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 5 साल में 674 से बढ़कर 891 हुई आबादी

गिर : एशियाई शेरों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 5 साल में 674 से बढ़कर 891 हुई आबादी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 06, 2026, 12:15:00 PM

देश में एशियाई शेरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में जहां इन शेरों की संख्या 674 थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 891 हो गई है। यह जानकारी गुरुवार को राज्यसभा में सरकार की ओर से साझा की गई।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि गुजरात सरकार से प्राप्त विवरण के अनुसार, एशियाई शेरों ने अब पारंपरिक वन क्षेत्रों से आगे निकलकर नए इलाकों में भी अपना विस्तार कर लिया है। इनमें अधिसूचित वन क्षेत्र, नदी गलियारे और यहां तक कि राजस्व विभाग की बंजर भूमि भी शामिल है। मंत्री ने बताया कि शेरों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव तथा बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने कई स्तरों पर कदम उठाए हैं। इनमें पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना प्रमुख पहल है, ताकि किसी भी बीमारी या आपात स्थिति में तुरंत उपचार संभव हो सके।

बर्दा अभयारण्य को बनाया जा रहा ‘दूसरा घर’

गुजरात सरकार ने बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को शेरों के लिए एक वैकल्पिक आवास के रूप में विकसित करना शुरू किया है। इसके साथ ही कॉरिडोर मैनेजमेंट से जुड़े उपायों को लागू कर विभिन्न शेर समूहों के बीच सुरक्षित आवागमन को आसान बनाया गया है, जिससे उनका प्राकृतिक विस्तार नए क्षेत्रों तक हो रहा है। सरकार के अनुसार जिन क्षेत्रों में शेरों की मौजूदगी हाल के वर्षों में बढ़ी है, वहां आवास सुधार के काम भी चल रहे हैं। इसमें घास के मैदानों को बेहतर बनाना और शिकार की उपलब्धता बढ़ाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। 

मंत्री ने बताया कि शेरों की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नजर रखने के लिए 2019 में सासन-गिर में एक आधुनिक निगरानी इकाई स्थापित की गई थी। रेडियो टेलीमेट्री के जरिए शेरों की निगरानी की जाती है।

इसके अलावा, एक व्यापक सैटेलाइट टेलीमेट्री अध्ययन भी किया गया है, जिसका उद्देश्य शेरों की पारिस्थितिकी, उनके फैलाव के पैटर्न, कॉरिडोर उपयोग, उप-आबादी की आवाजाही, मौसमी बदलाव, भूमि उपयोग की प्राथमिकताओं और प्रबंधन की जरूरतों से जुड़ा वैज्ञानिक डेटा जुटाना रहा।

स्थानीय समुदायों को जोड़ा गया

वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रैकर्स नियुक्त किए गए हैं। सरकार का कहना है कि गिर और ग्रेटर गिर क्षेत्रों में शेरों के लिए उपयुक्त वातावरण बनाए रखने हेतु घास के मैदानों का विकास, शिकार आधार बढ़ाने और अन्य संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी गई है। शेरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे पटरियों के आसपास विशेष उपाय लागू किए गए हैं। मंत्री के अनुसार, रेलवे ट्रैक के पास शेरों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है। संवेदनशील इलाकों में ट्रेनों की गति सीमा तय की गई है, साथ ही निगरानी और गश्त को भी बढ़ाया गया है। 

सरकार ने यह भी बताया कि इंसानी बस्तियों की ओर शेरों की आवाजाही कम करने के लिए जल संसाधनों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि जानवरों को जंगलों के भीतर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मंत्री ने कहा कि ग्रेटर गिर परिदृश्य में उप-आबादी के प्रबंधन और संरक्षण तंत्र को मजबूत करने जैसे कदमों के जरिए शेरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली है।