पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति और भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता, प्रसिद्ध वकील और राजनेता स्वराज कौशल का गुरुवार को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी दिल्ली भाजपा ने अपने आधिकारिक X हैंडल के माध्यम से साझा की। बताया गया कि उनका अंतिम संस्कार लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जाएगा।
स्वराज कौशल भारतीय इतिहास में सबसे कम उम्र में राज्यपाल बनने वाले व्यक्तित्व थे। वर्ष 1990 में उन्हें केवल 37 वर्ष की आयु में मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके अलावा वे 1998 से 2004 तक हरियाणा से राज्यसभा सांसद रहे और सुप्रीम कोर्ट में सीनियर अधिवक्ता के रूप में कई अहम मामलों की पैरवी की।
अपने पिता के निधन पर भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने X पर भावनात्मक पोस्ट लिखते हुए कहा—
“पापा स्वराज कौशल जी, आपका स्नेह, अनुशासन, सरलता, राष्ट्रभक्ति और धैर्य मेरे जीवन की वह लौ है जो कभी बुझ नहीं सकती। आपका जाना हृदय को चीर देने वाला दर्द है, पर विश्वास है कि आप अब मां के साथ फिर से मिल चुके हैं, ईश्वर की शरण में, शांति के आलोक में। आपका आशीर्वाद और आपकी विरासत ही मेरी हर राह का आधार रहेंगी।”
देश विभाजन के समय लाहौर के धरमपुरा में रहने वाले हरदेव शर्मा और लक्ष्मी देवी बाद में हरियाणा के अंबाला में बस गए थे। इसी परिवार में 14 फरवरी 1952 को सुषमा का जन्म हुआ। पढ़ाई में तेज होने के चलते उन्होंने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान में स्नातक किया और फिर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई पूरी की।
लॉ कॉलेज और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस के दौरान ही सुषमा शर्मा की मुलाकात स्वराज कौशल से हुई। जहां सुषमा RSS की विचारधारा से प्रभावित थीं, वहीं स्वराज समाजवादी सोच रखते थे। अलग विचारधारा के बावजूद दोनों के बीच निकटता बढ़ी और प्रेम पनपा।
यह वह दौर था जब देश में आपातकाल लगा हुआ था। सोशलिस्ट नेता और पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को बड़ौदा डायनामाइट केस में गिरफ्तार किया गया था। सुषमा और स्वराज अक्सर उनके मामले की पैरवी के लिए साथ अदालत जाते थे। धीरे-धीरे दोनों के परिवार भी इस रिश्ते को स्वीकार करने लगे और 13 जुलाई 1975 को इमरजेंसी के दौरान उनकी शादी हुई।
आपातकाल के बाद जॉर्ज फर्नांडिस ने जेल से ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उनकी ओर से सुषमा स्वराज ने बड़ौदा जाकर नामांकन दाखिल किया और एक नारा दिया—
"जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा।"
यह नारा पूरे देश में लोकप्रिय हुआ और जॉर्ज फर्नांडिस भारी मतों से चुनाव जीत गए।