होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा खतरा! हमलों से समुद्री यातायात लगभग ठप, IFC-IOR ने जारी की चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा खतरा! हमलों से समुद्री यातायात लगभग ठप, IFC-IOR ने जारी की चेतावनी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 04, 2026, 4:02:00 PM

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब समुद्री मार्गों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत स्थित सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में अरब खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी को अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है। केंद्र ने इन जलमार्गों से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने और अपने मार्ग की जानकारी नियमित रूप से साझा करने की सलाह दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी के बाद से अब तक 29 समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 23 जहाज सीधे निशाने पर आए। इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय योजनाबद्ध तरीके से जारी है। हाल के हमलों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीच में आया शांत दौर किसी स्थायी समाधान का संकेत नहीं, बल्कि रणनीतिक विराम था।

विश्लेषण में यह भी बताया गया है कि हमलों का दायरा अब केवल होर्मुज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तरी अरब खाड़ी, संयुक्त अरब अमीरात के समुद्री क्षेत्र और प्रमुख बंदरगाहों के आसपास तक फैल चुका है। इन हमलों में मिसाइल, ड्रोन (यूएवी), मानवरहित पोत (यूएसवी) और अन्य आधुनिक साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे खतरे की प्रकृति और जटिल हो गई है।

समुद्री यातायात पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। जहां पहले प्रतिदिन 130 से 140 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर महज 4 से 5 रह गई है। कई दिनों तक तो आवाजाही लगभग शून्य रही, जो जहाज संचालकों की बढ़ती सतर्कता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि वाणिज्यिक जहाजों को अब कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ रहा है—चाहे वह मिसाइल हमले हों, ड्रोन स्ट्राइक, अज्ञात सशस्त्र समूहों की गतिविधियां या संघर्ष के कारण होने वाले अप्रत्यक्ष नुकसान। खासतौर पर वे जहाज जो लंगर डाले हुए हैं या सीमित गति में हैं, अधिक जोखिम में हैं।

एक और गंभीर चिंता जीपीएस और जीएनएसएस सिग्नलों में हो रहा व्यवधान है, जिससे नेविगेशन सिस्टम और जहाजों की स्थिति की सटीक जानकारी प्रभावित हो रही है। इससे समुद्री संचालन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर भी मिसाइल हमला हुआ, जबकि कई विदेशी जहाज ड्रोन और अन्य हथियारों के निशाने पर आए हैं। हमलों में किसी विशेष प्रकार के जहाज को निशाना नहीं बनाया जा रहा—कच्चे तेल के टैंकर, कंटेनर जहाज, बल्क कैरियर और अन्य पोत सभी प्रभावित हुए हैं।

ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन करीब 21 मिलियन बैरल तेल गुजरता है। मौजूदा हालात में यह मार्ग लगभग बंद जैसा हो गया है, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

वैकल्पिक मार्ग के रूप में जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजने पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इससे यात्रा समय और लागत दोनों बढ़ते हैं। कुछ ऑपरेटर सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन या ओमान के दुक्म बंदरगाह जैसे विकल्पों की भी तलाश कर रहे हैं।

IFC-IOR ने दोहराया है कि क्षेत्र में खतरे का स्तर अभी भी अत्यधिक बना हुआ है और यह स्थिति अनिश्चित, व्यापक और लगातार बदलती हुई है। ऐसे में सभी समुद्री हितधारकों को सतर्क रहकर समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटा जा सके।