असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बड़ा फैसला लेते हुए अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाई है। पार्टी ने राज्य की 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी पूरी कर ली है, जबकि एक सीट वाम दल माले के लिए छोड़ी गई है।
पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर लंबे समय तक बातचीत चली, लेकिन अंततः सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि साझा रणनीति बनाना संभव नहीं हो पाया।
सूत्रों के मुताबिक, 22 मार्च की शाम तक दोनों पक्षों के बीच वार्ता जारी रही। कांग्रेस जहां सीमित सीटों का प्रस्ताव दे रही थी, वहीं झामुमो अधिक हिस्सेदारी चाहता था। सीटों की संख्या को लेकर यह खींचतान आखिरकार गतिरोध में बदल गई और बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
गठबंधन की संभावनाएं खत्म होने के बाद झामुमो ने स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। पार्टी अब अपने दम पर चुनाव लड़कर राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।