जनगणना 2027 : ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ से खुद भर सकेंगे विवरण, नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा का प्रावधान

जनगणना 2027 : ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ से खुद भर सकेंगे विवरण, नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा का प्रावधान

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 30, 2026, 12:50:00 PM

देश में अगली जनगणना को लेकर केंद्र सरकार तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। इसी क्रम में रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान पूरी प्रक्रिया की रूपरेखा साझा करेंगे। इस ब्रीफिंग में देशभर में जनगणना संचालन के तरीके, चरणबद्ध कार्ययोजना और नई व्यवस्थाओं पर विस्तार से जानकारी दिए जाने की संभावना है।

जनगणना से पहले अधिकारियों के लिए सख्त दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। रजिस्ट्रार जनरल ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही, आंकड़ों के दुरुपयोग, सर्वे कार्य में बाधा या नागरिकों से अनुचित प्रश्न पूछना गंभीर अपराध माना जाएगा। इन मामलों में जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। धारा 11 के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माने से लेकर अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। यह चेतावनी 17 मार्च को राज्यों को भेजे गए आधिकारिक संदेश के माध्यम से दी गई थी।

आगामी जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्ण डिजिटलीकरण होगा। पहली बार नागरिकों को एक निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी, जिसे ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ कहा जा रहा है। इससे पारंपरिक तौर पर घर-घर जाकर डेटा जुटाने की प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी और आंकड़ों का संकलन अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।

इस बार जनगणना में सामाजिक बदलावों को भी ध्यान में रखा गया है। जानकारी के मुताबिक, यदि किसी घर में साथ रह रहे अविवाहित जोड़े अपने संबंध को स्थायी मानते हैं, तो उन्हें विवाहित श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है। यह रुख पहली बार आधिकारिक तौर पर जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, जो बदलती सामाजिक संरचना को दर्शाता है।

जनगणना के प्रारंभिक चरण, जिसे ‘हाउसलिस्टिंग’ कहा जाता है, में देशभर के घरों का विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा। इस चरण के अंतर्गत 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें परिवार और वैवाहिक स्थिति से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे। यह चरण लगभग 45 दिनों तक चलेगा और इसकी समय-सीमा 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच तय की गई है। अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इसका शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से न केवल प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी पहले की तुलना में अधिक सहज और प्रभावी हो सकेगी।