CAG रिपोर्ट में रक्षा तंत्र की खामियां उजागर; सैन्य अस्पतालों, वेतन प्रणाली और निर्माण कार्यों पर उठे सवाल

CAG रिपोर्ट में रक्षा तंत्र की खामियां उजागर; सैन्य अस्पतालों, वेतन प्रणाली और निर्माण कार्यों पर उठे सवाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Mar 31, 2026, 2:34:00 PM

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी अपनी ताजा रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की, जिसमें सेना के विभिन्न तंत्रों में कई महत्वपूर्ण कमियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में खास तौर पर सैन्य अस्पतालों की स्थिति, जवानों के वेतन-भत्तों के भुगतान और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर चिंता जताई गई है।

ऑडिट में पाया गया कि सेना के कई जवानों को उनका वेतन और भत्ते समय पर और सटीक रूप से नहीं मिल पाए। इसके पीछे आईटी सिस्टम में खामियां और प्रक्रियात्मक कमजोरियां जिम्मेदार बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समय पर समीक्षा नहीं होने से सेवानिवृत्ति के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और अन्य कर्मियों से एकमुश्त बड़ी रकम की वसूली की गई।

इसके अलावा, छुट्टियों के दौरान यात्रा के लिए जारी किए जाने वाले प्रिविलेज टिकट ऑर्डर (PTO) में भी देरी सामने आई। HRMS प्रणाली में जानकारी के अभाव के कारण कई आवेदन अस्वीकृत हो गए। CAG ने सुझाव दिया है कि विभिन्न डिजिटल सिस्टम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और अस्वीकृत मामलों की निगरानी के लिए स्वचालित तंत्र विकसित किया जाए।

निर्माण कार्यों के मामले में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) से जुड़े प्रोजेक्ट्स में साइट रिकॉर्ड्स का समुचित रखरखाव नहीं किया गया, जिससे कार्य की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना कठिन हो गया। CAG ने इन रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण की सिफारिश की है, ताकि काम की प्रगति, सामग्री और परीक्षण से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से संरक्षित की जा सके।

सैन्य अस्पतालों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। कई अस्पतालों की इमारतें जर्जर अवस्था में हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं की गई। जून 2022 में लैंसडाउन स्थित एक सैन्य अस्पताल का हिस्सा गिरने की घटना इसका उदाहरण है। इसके अलावा कई स्थानों पर हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (HVAC) तथा अग्निशमन प्रणालियां अधूरी पाई गईं।

दवाओं की आपूर्ति में भी कमी उजागर हुई है। आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) द्वारा आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जा सकी। यहां तक कि सामान्य उपयोग की दवाएं भी कई जगह पर्याप्त मात्रा में नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं के समय पर निस्तारण न होने से करीब 13.52 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं अटकी रहीं।

रिपोर्ट में चिकित्सा मानकों के उल्लंघन के भी मामले सामने आए हैं। कई अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं किया गया और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं रखे गए। कुछ स्थानों पर बिना वैध लाइसेंस के एक्स-रे मशीनों के संचालन की बात भी सामने आई है।

सात सैन्य कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे अधिक अनियमितताएं पाई गईं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ सुधारात्मक कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अब भी पूरी तरह से दूर नहीं हो सकी हैं।