भारत-वियतनाम के बीच हुये 13 समझौते, रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल

भारत-वियतनाम के बीच हुये 13 समझौते, रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : May 06, 2026, 4:09:00 PM

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा भरने वाला अहम कदम माना जा रहा है। तीन दिवसीय दौरे पर आए राष्ट्रपति लाम ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत में द्विपक्षीय वार्ताओं में हिस्सा लिया, जिसमें व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच कुल 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के बाद कहा कि दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक ले जाने का साझा निर्णय लिया गया है। उन्होंने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘विजन ओशन’ का महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की सोच काफी हद तक समान है।

सांस्कृतिक सहयोग को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत वियतनाम की प्राचीन चम्पा सभ्यता से जुड़े मी सॉन और न्हान टावर मंदिरों के पुनरुद्धार में सहयोग कर रहा है। इसके साथ ही, इस सभ्यता से जुड़ी पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की योजना भी बनाई गई है, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक संतुलन के मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने चर्चा की। माना जा रहा है कि प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, विशेष रूप से चीन की भूमिका, पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से दोनों देश कानून के शासन, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

आर्थिक और वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भी कई पहल की गई हैं। दोनों देशों ने अपने-अपने केंद्रीय बैंकों के बीच तालमेल बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वियतनाम के साथ मजबूत संबंधों के जरिए भारत, आसियान देशों के साथ अपने जुड़ाव को और सुदृढ़ करेगा। वहीं राष्ट्रपति तो लाम ने राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी बढ़ा है। पिछले वर्ष पनडुब्बी खोज एवं बचाव से जुड़े ढांचे के निर्माण के लिए एक समझौता हुआ था, जबकि रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के लिए आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए थे।