भारत को रूस का बड़ा रक्षा प्रस्ताव, Su-57 स्टील्थ फाइटर के संयुक्त उत्पादन की पेशकश, जानिए कितनी ताकतवर है पांचवीं पीढ़ी की यह स्टील्थ फाइटर जेट

भारत को रूस का बड़ा रक्षा प्रस्ताव, Su-57 स्टील्थ फाइटर के संयुक्त उत्पादन की पेशकश, जानिए कितनी ताकतवर है पांचवीं पीढ़ी की यह स्टील्थ फाइटर जेट

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 08, 2026, 4:27:00 PM

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पेशकश सामने आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 उपलब्ध कराने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही रूस ने यह सुझाव भी दिया है कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए इस विमान का निर्माण भारत में संयुक्त रूप से किया जा सकता है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपनी स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान परियोजना एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को आगे बढ़ा रहा है और भविष्य की वायु शक्ति को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।

Su-57 रूस का पहला परिचालन स्तर का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। इसे रूसी वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया था। पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो इसे "फेलॉन" नाम से पहचानता है।

इस विमान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों से बचते हुए लंबी दूरी तक सटीक हमले कर सके। साथ ही यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम है। रूस ने इसे अमेरिकी F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग-II जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के मुकाबले के लिए विकसित किया था।

Su-57 दो इंजनों से लैस एक सुपरसोनिक मल्टीरोल फाइटर जेट है। इसकी अधिकतम गति लगभग मैक 2.0 यानी करीब 2,458 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है। यह क्षमता इसे दुनिया के तेज़ स्टील्थ लड़ाकू विमानों की श्रेणी में शामिल करती है।

विमान में लगे दो सैटर्न AL-41F1 टर्बोफैन इंजन न केवल इसे उच्च गति प्रदान करते हैं, बल्कि हवाई युद्ध के दौरान बेहतरीन गतिशीलता भी उपलब्ध कराते हैं। इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता सुपरक्रूज क्षमता है, जिसके तहत यह आफ्टरबर्नर का उपयोग किए बिना भी लगभग मैक 1.3 की सुपरसोनिक गति बनाए रख सकता है।

ईंधन बचत और लंबी मारक क्षमता

सुपरक्रूज तकनीक का सबसे बड़ा लाभ ईंधन की बचत है। आफ्टरबर्नर के बिना उच्च गति पर उड़ान भरने से विमान लंबे समय तक मिशन पर बना रह सकता है। इसी वजह से Su-57 की युद्धक पहुंच लगभग 1,900 किलोमीटर तक मानी जाती है, जो इसे लंबी दूरी के अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है।

रूस वर्तमान में इस लड़ाकू विमान के लिए एक नए इंजन इजडेलिये-30 (AL-51F1) के विकास पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि यह इंजन विमान की गति, दक्षता और सुपरक्रूज प्रदर्शन को और बेहतर बनाएगा, जिससे इसकी युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

Su-57 ने अपनी पहली उड़ान 29 जनवरी 2010 को रूस के कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर क्षेत्र में भरी थी। इसके बाद कई वर्षों तक प्रोटोटाइप और विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण किया गया। 2017 तक इसके प्रमुख विकास चरण पूरे कर लिए गए थे और इसके बाद राज्य स्तरीय परीक्षणों का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।खुले स्रोतों पर उपलब्ध रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, 2025 के आसपास एक Su-57 विमान की अनुमानित कीमत 35 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच आंकी जाती है। वास्तविक लागत इसमें इस्तेमाल किए गए इंजन, एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों के आधार पर बदल सकती है। इसकी परिचालन लागत भी कई पश्चिमी समकक्ष विमानों की तुलना में अपेक्षाकृत कम बताई जाती है।

F-35 के मुकाबले Su-57

तकनीकी तुलना में Su-57 कई क्षेत्रों में अलग पहचान रखता है। इसकी अधिकतम गति F-35 से अधिक है और इसका युद्धक दायरा भी लंबा माना जाता है। हालांकि, स्टील्थ तकनीक के मामले में विशेषज्ञ F-35 को अधिक परिष्कृत मानते हैं। जहां Su-57 दो इंजनों पर आधारित है, वहीं F-35 एकल इंजन वाला विमान है। इसके अलावा F-35 का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक संचालन पहले से स्थापित है, जबकि Su-57 का परिचालन दायरा अभी अपेक्षाकृत सीमित है।

भारत-रूस रक्षा संबंध और बदलता परिदृश्य

भारत लंबे समय से रूसी सैन्य उपकरणों का प्रमुख खरीदार रहा है। लेकिन यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में आई बाधाओं और डिलीवरी में देरी ने नई दिल्ली को रक्षा खरीद के स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है।

इसी बीच भारत ने अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम AMCA को प्राथमिकता दी है। इसे भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जाता है और इसका उद्देश्य भविष्य में विदेशी निर्भरता को कम करना है।

भारत और रूस ने लगभग डेढ़ दशक तक फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) कार्यक्रम पर संयुक्त रूप से काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की थी। हालांकि परियोजना की बढ़ती लागत और अन्य तकनीकी व आर्थिक कारणों के चलते भारत ने 2021 में इसमें आगे बढ़ने को लेकर अपनी अनिच्छा जाहिर की थी। उस समय इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत करीब 30 अरब डॉलर यानी लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बताई गई थी।

रूस की ताज़ा पेशकश ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी भविष्य की वायु शक्ति के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रहा है। ऐसे में Su-57 और संभावित संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव आने वाले वर्षों में भारत-रूस रक्षा सहयोग की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।