बजट 2026 के बाद अब RBI से उम्मीदें, लेकिन रेपो रेट में कटौती के आसार कमजोर

बजट 2026 के बाद अब RBI से उम्मीदें, लेकिन रेपो रेट में कटौती के आसार कमजोर

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Feb 04, 2026, 2:30:00 PM

केंद्रीय बजट 2026 से आयकर और राहत योजनाओं के जरिए बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे मध्यम वर्ग को इस बार खास राहत नहीं मिली। बजट में न तो इनकम टैक्स को लेकर कोई बड़ी घोषणा हुई और न ही वेतनभोगी वर्ग के लिए कोई ऐसी नई स्कीम सामने आई, जिससे सीधा फायदा मिलता। ऐसे में अब लोगों की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर टिक गई हैं।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक 4 फरवरी से शुरू हो चुकी है, जो 6 फरवरी तक चलेगी। इसी दिन रेपो रेट को लेकर अंतिम फैसला और बड़ा ऐलान किया जाएगा। आमतौर पर जब बजट से राहत नहीं मिलती, तो जनता को उम्मीद रहती है कि RBI ब्याज दरों में कटौती कर लोन और EMI का बोझ कम करेगा। हालांकि इस बार परिस्थितियां कुछ अलग नजर आ रही हैं।

रेपो रेट घटने की संभावना बेहद कम

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार MPC बैठक से ब्याज दरों में कटौती जैसे बड़े फैसले की संभावना सीमित है। रेपो रेट में बदलाव की उम्मीद कमजोर मानी जा रही है।

दरअसल, वर्ष 2025 में RBI पहले ही चार बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है। कुल मिलाकर करीब 1.25 प्रतिशत की कमी की गई थी, जिससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.25% तक पहुंच गया। ऐसे में केंद्रीय बैंक पहले ही ब्याज दरों के मोर्चे पर पर्याप्त राहत दे चुका है।

EMI में तुरंत राहत मिलना मुश्किल

यदि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाता, तो होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई तत्काल राहत नहीं मिलेगी। मध्यम वर्ग, जो पहले से महंगाई और बढ़ते खर्चों के दबाव में है, उसे ब्याज दरों के मामले में भी इंतजार करना पड़ सकता है।

वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी बाजारों में अनिश्चितता को देखते हुए RBI इस बार बेहद सतर्क रुख अपना सकता है। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता हो सकती है, भले ही दरों में कटौती की मांग बनी रहे।