बुलंदशहर के आदित्य ने बनाया AI आधारित रोबोट ‘सोफी’, बच्चों को पढ़ाने में करेगी मदद

बुलंदशहर के आदित्य ने बनाया AI आधारित रोबोट ‘सोफी’, बच्चों को पढ़ाने में करेगी मदद

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Nov 29, 2025, 5:00:00 PM

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के 17 वर्षीय आदित्य कुमार ने तकनीक के क्षेत्र में अद्भुत उदाहरण पेश किया है। शिव चरण इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले आदित्य ने ‘सोफी’ नाम का एक AI टीचर रोबोट तैयार किया है, जिसमें लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) चिपसेट लगा हुआ है। इस चिपसेट की मदद से सोफी न केवल खुद बोलकर पढ़ा सकती है, बल्कि छात्रों के प्रश्नों को समझकर तुरंत जवाब भी दे सकती है। यानी यह बिल्कुल एक वास्तविक शिक्षक की तरह संवाद कर सकती है।

डेमो में दिखाई शानदार क्षमता
प्रदर्शन के दौरान आदित्य ने सोफी से कई तरह के सवाल पूछे—दुनिया की सबसे ऊंची इमारत कौन-सी है, भारत के पहले राष्ट्रपति और पहले प्रधानमंत्री कौन थे, बिजली क्या होती है, और 100 + 92 कितना होता है? हर प्रश्न का सोफी ने सटीक और तुरंत उत्तर देकर सभी को चौंका दिया। इससे उसकी समझ, सीखने की क्षमता और जवाब देने की कुशलता का पता चलता है।

जब आदित्य ने सोफी को अपना परिचय देने के लिए कहा, तो रोबोट ने बच्चों से संबोधित करते हुए कहा—“हेलो बच्चों, मैं एक AI टीचर रोबोट हूं। मेरा नाम सोफी है और मुझे आदित्य ने बनाया है। मैं शिवचरण इंटर कॉलेज में पढ़ाती हूं। क्या आप मुझसे कुछ पूछना चाहते हैं?”

बच्चों की पढ़ाई आसान बनाना है उद्देश्य
आदित्य के मुताबिक, इस रोबोट को बनाने का मुख्य लक्ष्य छात्रों की पढ़ाई को सरल बनाना और तुरंत समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सोफी केवल बोल सकती है, लेकिन आने वाले समय में वह इसे लिखने की क्षमता भी देना चाहते हैं। आदित्य का मानना है कि यदि किसी दिन कोई शिक्षक अनुपस्थित हो जाए, तो सोफी पूरी तरह से कक्षा संभाल सकती है। फिलहाल सोफी हिंदी भाषा में संवाद करती है।

रिसर्च लैब स्थापित करने की मांग
आदित्य का कहना है कि हर जिले में रिसर्च और इनोवेशन लैब होनी चाहिए, ताकि छात्र नई तकनीकों पर काम कर सकें और अपने आइडिया को वास्तविक रूप दे सकें। उनका यह प्रयास स्कूल स्तर पर तकनीकी नवाचार का बेहतरीन उदाहरण बन गया है और पूरे प्रदेश में चर्चा का कारण बना हुआ है। यह पहल यह भी दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन व संसाधन मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी बड़े सपने साकार कर सकते हैं।