अदाणी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव में ‘भारत नॉलेज ग्राफ’ की घोषणा, गौतम अदाणी ने दिया 100 करोड़ का योगदान

अदाणी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव में ‘भारत नॉलेज ग्राफ’ की घोषणा, गौतम अदाणी ने दिया 100 करोड़ का योगदान

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Nov 21, 2025, 5:29:00 PM

अदाणी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के सभ्यतागत ज्ञान को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से भविष्य के लिए संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने ‘भारत नॉलेज ग्राफ’ नामक एक अनूठे डिजिटल ढांचे के निर्माण का संकल्प लेते हुए इसके लिए 100 करोड़ रुपये का संस्थापक योगदान देने की घोषणा की। यह प्रयास एआई युग में भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह तीन दिवसीय कॉन्क्लेव, जिसे अदाणी समूह ने शिक्षा मंत्रालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) के साथ मिलकर आयोजित किया है, का उद्देश्य इंडोलॉजी यानी भारत की सभ्यताओं, भाषाओं, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर के वैश्विक अध्ययन को फिर से गति देना है।

अपने संबोधन में गौतम अदाणी ने कहा, “भारत नॉलेज ग्राफ के निर्माण के लिए यह योगदान मेरे लिए सभ्यता के प्रति कर्तव्य निभाने जैसा है। यह सिर्फ तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान की विश्वस्तरीय पुनर्स्थापना का मिशन है।”

शंकराचार्य ने पहल को बताया ऐतिहासिक

कॉन्क्लेव में विशेष अतिथि के रूप में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी उपस्थित थे, जो ज्योतिर मठ के 46वें शंकराचार्य हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “मैंने शंकराचार्य पद ग्रहण करते समय संकल्प लिया था कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में योगदान दूंगा। अदाणी जी की यह पहल उस दिशा में एक बड़ा और सार्थक कदम है।”

20–22 नवंबर तक अहमदाबाद में आयोजित

यह कार्यक्रम अहमदाबाद स्थित अदाणी कॉर्पोरेट हाउस (ACH) में 20 से 22 नवंबर 2025 तक आयोजित हो रहा है। ऐसे समय में जब विश्वभर में इंडोलॉजी विभाग घट रहे हैं, यह आयोजन भारत के ज्ञान को प्रामाणिक भारतीय दृष्टिकोण के साथ वैश्विक समुदाय तक पहुँचाने की एक कोशिश है।

गौतम अदाणी ने चेतावनी दी कि यदि कोई सभ्यता अपने सांस्कृतिक आधार की रक्षा नहीं करती, तो वह धीरे-धीरे तकनीकी एल्गोरिद्म की कृत्रिम सोच के सामने झुकने लगती है। उन्होंने कहा, “यह बदलाव धीरे-धीरे हमारे सीखने, समझने और देश को देखने के तरीके को बदल देता है।”

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का संगम

अदाणी समूह और IKS ने देशभर के प्रमुख संस्थानों में 14 पीएचडी शोधार्थियों को समर्थन देने के लिए पाँच वर्षीय कार्यक्रम शुरू किया है। इनके अनुसंधान विषयों में पाणिनीय व्याकरण, कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, प्राचीन खगोल विज्ञान, स्वदेशी स्वास्थ्य प्रणाली, पारंपरिक इंजीनियरिंग, राजनीतिक दर्शन, विरासत अध्ययन और शास्त्रीय साहित्य शामिल हैं।

यह विद्वान कठोर राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के बाद चुने गए हैं, जिसमें IIT, IIM, IKS-आधारित विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित विद्वानों की भागीदारी रही। इस पहल का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों—जैसे डेटा साइंस, सिस्टम्स थिंकिंग और मल्टीमॉडल डिजिटल आर्काइविंग—को भारतीय शास्त्रीय ज्ञान के साथ जोड़कर इंडोलॉजी को आज के वैश्विक शोध परिदृश्य में प्रासंगिक बनाना है।

भारत की सांस्कृतिक शक्ति को मजबूत करने की पहल

वसुधैव कुटुम्बकम्’—पूरी दुनिया एक परिवार—के सिद्धांत पर आधारित यह प्रयास भारतीय सॉफ्ट पावर को सशक्त करने और सभ्यतागत नेतृत्व को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

अदाणी समूह की यह ऐतिहासिक घोषणा न सिर्फ इंडोलॉजी को नई ऊर्जा देती है, बल्कि विश्व स्तर पर भारतीय सभ्यतागत ज्ञान की पुनर्स्थापना की दिशा में एक निर्णायक पहल भी साबित हो सकती है।