केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आने वाला समय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग को लेकर नई सिफारिशें सामने आई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से तैयार इन सुझावों में वेतन ढांचे, पेंशन व्यवस्था और भत्तों में व्यापक सुधार की बात कही गई है। यह मसौदा नेशनल काउंसिल (जेसीएम) की ड्राफ्ट कमेटी द्वारा तैयार कर सरकार को सौंपा गया है, जिसमें 2026 से नई वेतन संरचना लागू करने का प्रस्ताव शामिल है।
सबसे प्रमुख सुझाव न्यूनतम मूल वेतन में बड़े इजाफे का है। प्रस्ताव के अनुसार बेसिक सैलरी को बढ़ाकर करीब 69 हजार रुपये तक करने की बात कही गई है। इसके लिए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की गई है, जिससे कर्मचारियों की कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसका असर पेंशन पर भी पड़ेगा, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
इसके अलावा वेतन वृद्धि को महंगाई से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार हर वर्ष लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों की आय समय के साथ स्थिर रूप से बढ़ती रहे और महंगाई का प्रभाव संतुलित किया जा सके।
वेतन ढांचे को सरल बनाने के लिए मौजूदा पे मैट्रिक्स में बदलाव की भी सिफारिश की गई है। वर्तमान 18 स्तरों वाली प्रणाली को घटाकर 7 स्तरों में समेटने का प्रस्ताव है, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहज हो सके। इससे कर्मचारियों को करियर प्रगति में स्पष्टता मिलने की उम्मीद जताई गई है।
पेंशन व्यवस्था में सुधार पर भी विशेष जोर दिया गया है। सिफारिशों में पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की मांग उठाई गई है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो 2004 के बाद नियुक्त हुए हैं। साथ ही अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत पेंशन के रूप में देने और पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव शामिल है। लंबी सेवा अवधि के दौरान कम से कम पांच पदोन्नतियां सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
भत्तों और सुविधाओं के दायरे को बढ़ाने की दिशा में भी कई प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें मकान किराया भत्ता बढ़ाने, बीमा कवरेज को मजबूत करने, सेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में अधिक आर्थिक सहायता देने और अवकाश नकदीकरण की सीमा समाप्त करने जैसे सुझाव शामिल हैं। इसके साथ ही मातृत्व अवकाश को 240 दिनों तक बढ़ाने तथा पितृत्व और पैरेंट केयर लीव में विस्तार की भी मांग की गई है।
फिलहाल ये सभी सुझाव प्रारंभिक स्तर पर हैं और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाना बाकी है। हालांकि, इन प्रस्तावों का प्रभाव देशभर के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है, इसलिए इन्हें बेहद अहम माना जा रहा है।