दुनिया को अलविदा कह गये 'अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर'; गोवर्धन असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन

दुनिया को अलविदा कह गये 'अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर'; गोवर्धन असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Oct 21, 2025, 10:23:00 AM

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता गोवर्धन असरानी, जिन्होंने फिल्म शोले में “अंग्रेजों के ज़माने के जेलर” वाला अमर किरदार निभाया था, अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार दोपहर करीब 1 बजे 84 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। बीते कुछ दिनों से वह अस्वस्थ चल रहे थे और फेफड़ों में पानी भरने के कारण अस्पताल में भर्ती थे।

असरानी के मैनेजर बाबूभाई थिबा ने बताया कि अभिनेता ने अपनी मृत्यु से पहले पत्नी से आग्रह किया था कि उनके निधन की सूचना अंतिम संस्कार के बाद ही दी जाए, क्योंकि वे कोई हलचल नहीं चाहते थे। उनकी यह इच्छा सम्मानपूर्वक पूरी की गई और सोमवार को ही मुंबई के सांताक्रूज स्थित शांतिनगर श्मशान घाट में चुपचाप उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें केवल परिवार के 15-20 सदस्य उपस्थित थे।

करीब छह दशकों के करियर में असरानी ने 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। शोले, अभिमान, चुपके चुपके, छोटी सी बात और भूल भुलैया जैसी फिल्मों में उनके यादगार किरदारों ने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।

1 जनवरी 1941 को जयपुर में जन्मे असरानी के पिता का कालीनों का कारोबार था, मगर उनका रुझान बचपन से ही फिल्मों की ओर था। राजस्थान कॉलेज, जयपुर से स्नातक होने के बाद वे ऑल इंडिया रेडियो में वॉइस आर्टिस्ट के रूप में कार्यरत रहे।

साल 1960 में उन्होंने साहित्य कलाभाई ठक्कर संस्थान में अभिनय की शिक्षा ली और 1964 में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (FTII) में दाखिला लिया। कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें पहली फिल्म हरे कांच की चूड़ियां (1967) में मौका मिला। जल्द ही ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें सत्यकाम (1969) में कास्ट किया, जिससे उन्हें पहचान मिली।

1971 में रिलीज हुई गुड्डी से असरानी की किस्मत चमक उठी, और उसके बाद वे हिंदी सिनेमा के सबसे प्रिय हास्य कलाकारों में गिने जाने लगे।