दूरदर्शन की मशहूर एंकर सरला माहेश्वरी का निधन, 71 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक सुनहरा अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया. 80 के दशक में घर-घर अपनी सौम्य आवाज और सटीक हिंदी उच्चारण से पहचान बनाने वाली दूरदर्शन की दिग्गज न्यूज एंकर सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Feb 12, 2026, 6:04:00 PM

भारतीय टेलीविजन इतिहास का एक सुनहरा अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया. 80 के दशक में घर-घर अपनी सौम्य आवाज और सटीक हिंदी उच्चारण से पहचान बनाने वाली दूरदर्शन की दिग्गज न्यूज एंकर सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है. 71 वर्ष की आयु में उन्होंने दिल्ली में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.

सादगी और गरिमा की मिसाल दूरदर्शन न्यूज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. डीडी ने लिखा, 'सरला माहेश्वरी दूरदर्शन की एक सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचक थीं. उन्होंने अपनी सौम्य आवाज, स्पष्ट उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में एक विशेष स्थान बनाया था.' उस दौर में जब न्यूज एंकर को न्यूज रीडर कहा जाता था, सरला माहेश्वरी अपनी सादगी और संयम के लिए जानी जाती थीं. उनकी शैली ने दर्शकों के दिलों में गहरा विश्वास पैदा किया था.

 परिवार की सूत्रों की मानें तो टहलने के दौरान गिरने से उनकी मौत हो गई. जानकारी ये भी मिली है कि वह लंबे समय से पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित चल रहीं थीं. बताते चलें कि पार्किंसंस बीमारी में मस्तिष्क के एक हिस्से (सबस्टैंशिया नाइग्रा) में डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं. इससे शरीर में कंपकंपी (कांपना), मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है. साथ ही इसकी वजह से लोग धीरे-धीरे चलने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि संतुलन बिगड़ने की संभावना रहती है. साथ ही इसकी वजह से कई बार बोलने-लिखने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती हैं. परिवार की सूत्रों के मुताबिक टहल कर घर लौटते समय गिरकर उनकी मौत हो गई.

साथियों ने कहा- 'वो सिर्फ चेहरे से ही नहीं, दिल से भी खूबसूरत थीं' सरला माहेश्वरी के निधन पर उनके पुराने सहयोगियों ने भावुक पोस्ट शेयर किए हैं. एक पूर्व सहकर्मी ने लिखा, 'मुझे अपनी पूर्व सह-न्यूज एंकर सरला माहेश्वरी के दुखद निधन की घोषणा करते हुए अत्यंत वेदना हो रही है. वह अनुग्रह और शिष्टाचार की प्रतिमूर्ति थीं. वह न केवल दिखने में, बल्कि दिल से भी उतनी ही खूबसूरत थीं. भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वह ज्ञान का भंडार थीं.'