सहरसा। शक्ति आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा। विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र का शुभारंभ होगा। इस दिन घरों एवं पूजा स्थलों पर विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू की जाएगी। नवरात्र को लेकर सहरसा शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बनने लगा है। विभिन्न पूजा समितियों द्वारा पंडाल निर्माण, विद्युत सज्जा, ध्वनि व्यवस्था एवं अन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
20 को महानवमी, 21 को विजयादशमी
नवरात्र के नौ दिनों में 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी तथा 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी। 18 अक्टूबर को मां महागौरी की पूजा के साथ अष्टमी व्रत किया जाएगा।
विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर, सोमवार को अष्टमी तिथि सुबह 8:04 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि का क्रम शुरू होगा। 20 अक्टूबर, मंगलवार को महानवमी मनाई जाएगी। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा। इसके अगले दिन 21 अक्टूबर, बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। विजयादशमी के साथ दशहरा पर्व का उल्लास रहेगा और विभिन्न पूजा स्थलों से मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू होगा।
पूजा समितियों ने तेज की तैयारी :-
नवरात्र को लेकर विभिन्न पूजा समितियां पंडाल निर्माण, आकर्षक विद्युत सज्जा, ध्वनि व्यवस्था, सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा से संबंधित तैयारियों में जुट गई हैं। वहीं, बाजारों में भी पूजा सामग्री, फल-फूल, चुनरी, प्रसाद सहित अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ने लगी है।
शक्ति के साथ संस्कार और सेवा का संदेश :-
हरि दर्शन सेवा संस्थान फाउंडेशन ट्रस्ट, सहरसा बिहार के संस्थापक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति, साधना, संस्कार, नारी सम्मान और सेवा की चेतना जागृत करने वाला महापर्व है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप मानव जीवन में साहस, संयम, ज्ञान, करुणा और सकारात्मक ऊर्जा के विभिन्न आयामों का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्वों की सार्थकता तभी है, जब उनके माध्यम से समाज में संस्कार, सेवा, सद्भाव और सकारात्मक चेतना का विस्तार हो। उन्होंने जिलेवासियों से नवरात्र एवं विजयादशमी पर्व को शांतिपूर्ण, सात्त्विक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की।
आचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन एवं प्रस्थान गज (हाथी) की सवारी पर माना जा रहा है, जिसे धार्मिक परंपरा में शुभप्रद संयोग के रूप में देखा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पर्व के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता, सेवा और नारी सम्मान को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट