सारंडा के वनवासियों को वनाधिकार पट्टा देने की मांग लेकर राज्यपाल से मिले BAP नेता

सारंडा के वनवासियों को वनाधिकार पट्टा देने की मांग लेकर राज्यपाल से मिले BAP नेता

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 12, 2026, 6:52:00 PM

भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के पश्चिमी सिंहभूम जिला इकाई के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर जिले से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। जिला अध्यक्ष सुशील बाड़ला के नेतृत्व में पहुंचे शिष्टमंडल ने लोक भवन में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप की मांग की।

ज्ञापन में पश्चिमी सिंहभूम जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के संचालन और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि खनिज संपदा से समृद्ध और संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित इस जिले में विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद खनन प्रभावित आबादी तक अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच रहा है। पार्टी ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच झारखंड उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की।

शिष्टमंडल ने राज्यपाल को बताया कि DMFT के माध्यम से संचालित कई योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने का दावा करते हुए उन्होंने कई परियोजनाओं की समीक्षा की आवश्यकता जताई।

ज्ञापन में मनोहरपुर प्रखंड के लाइलोर राजस्व ग्राम में स्थापित एक जलापूर्ति योजना का विशेष उल्लेख किया गया। बताया गया कि इस परियोजना का उद्देश्य आसपास के नौ गांवों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन पाइपलाइन नेटवर्क अधूरा रहने के कारण योजना का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका। इसके चलते स्थानीय लोग अब भी सुरक्षित पेयजल की सुविधा से वंचित हैं और दूषित जल के उपयोग को मजबूर हैं।

इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने सारंडा क्षेत्र में लंबे समय से निवास कर रहे वनवासी परिवारों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2005 से पहले से बसे लोगों को वनाधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुरूप वनाधिकार पट्टे प्रदान किए जाएं। साथ ही इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में आदिवासी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास, पारदर्शी प्रशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई है।